
नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। विदिशा जिले में ही करीब 8 से 10 हजार लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और अपनी बीमारी से परिचित हैं, लेकिन इससे करीब दोगुने लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्हें शरीर में बढ़ रही शुगर की जानकारी ही नहीं है। यही वजह है कि डॉक्टर नियमित जांच को जरूरी बता रहे हैं। शनिवार से सांची रोड स्थित मगधम रिजॉर्ट में शुरू हुए रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) मध्य प्रदेश चैप्टर के 11वें दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में प्रदेशभर से आए विशेषज्ञों ने डायबिटीज के बढ़ते खतरे, बदलती जीवनशैली और आधुनिक उपचार पर मंथन किया।
सम्मेलन में करीब 70 शोध प्रस्तुत किए गए।इस सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे। उन्होंने ‘मधुमेह मित्र’ पुस्तक का विमोचन किया और विशेषज्ञ डॉक्टरों को सम्मानित किया। उन्होंने स्वास्थ्य को सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए लोगों से अपनी सेहत के प्रति सजग रहने की अपील की। वे करीब एक घंटे तक कार्यक्रम में रहे और डॉक्टरों से चर्चा की।
सम्मेलन में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप गुप्ता ने जीवनशैली से जुड़े जोखिमों पर चर्चा करते हुए बताया कि युवाओं में कम नींद लेना और देर रात तक जागने की आदत डायबिटीज के प्रमुख जोखिमों में शामिल हो रही है। व्यस्त जीवनशैली के बीच रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, सलाद और दालों को नियमित रूप से शामिल करने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि विदिशा में करीब 8 से 10 हजार ऐसे मरीज हैं, जिन्हें अपनी डायबिटीज की जानकारी है। अनुमान है कि इससे लगभग दोगुने लोग ऐसे हैं, जिन्हें बीमारी होने का पता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान और नियंत्रण दोनों संभव हैं। उनका कहना था कि 2001 की तुलना में आज पहचाने गए मरीजों की संख्या ही दोगुनी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा मुफ्त उपलब्ध है। एक उम्र के बाद सामान्य लोगों को भी शुगर की जांच कराते रहना चाहिए।
भोपाल से आईं डॉ. नर्मदा पटेल ने बताया कि सम्मेलन में विदिशा, नर्मदापुरम और रायसेन के चिकित्सा अधिकारियों, एचओ और नर्सिंग स्टाफ को इंसुलिन के आधुनिक उपयोग और तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं एलएन मेडिकल कॉलेज भोपाल की टीम ने महिलाओं की बदलती जीवनशैली और उनमें बढ़ते डायबिटीज जोखिम से जुड़े शोध प्रस्तुत किए।
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अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज विदिशा के डॉ. विनोद दांगी ने बच्चों में बढ़ते डायबिटीज के मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्क्रीन देखते हुए बच्चों के ज्यादा खाने की आदत यानी ओवरईटिंग भी जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने बच्चों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और खान-पान को संतुलित रखने पर जोर दिया।
उनका कहना था कि वर्तमान समय में गेहूं की रोटी का अधिक सेवन भी डायबिटीज का कारण बन सकता है। पहले के समय में गेहूं आसानी से पच जाता था, लेकिन आज की सुस्त दिनचर्या में नियमित व्यायाम के साथ गेहूं की जगह डाइट में चावल या मल्टीग्रेन अनाज का उपयोग भी शुरू करना चाहिए। सम्मेलन में डायबिटीज की जटिलताओं, नई दवाओं, आधुनिक उपचार पद्धतियों और नवीनतम शोध पर भी चर्चा हुई।