
नवदुनिया प्रतिनिधि,विदिशा। कलयुगी गंगा मां बेतवा में पानी बुरी तरह से प्रदूषित हो गया है। अभी तक बेतवा में हलाली से पानी भी नहीं आ सका। जबकि आज 26 अक्टूबर से कार्तिक स्नान शुरू हो जाएंगे जिसमें सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु महिलाएं सूर्योदय के पहले बेतवा में स्नान करने पहुंचती हैं। इस साल यदि हलाली से पानी नहीं छोड़ा गया तो उन्हें गंदे और प्रदूषित पानी में ही स्नान करना पड़ेगा। साल 2009 में ऐसी स्थिति बनी थी जब बेतवा पूरी तरह से सूख गई थी। 18 साल बाद फिर ऐसा समय आया है कि बेतवा नदी का पानी कम हो चुका।
बता दें कि सनातन धर्म में कार्तिक स्नान का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। पंडित संजय पुरोहित ने बताया कि कथा के मुताबिक कार्तिक स्नान करना तो दूर स्नान करने वाले श्रद्धालु के दर्शन कर लेने मात्र से पापों का नाश होने की बात कही गई है। एक हजार बार गंगा स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह एक माह तक कार्तिक स्नान करने से मिल जाता है।
यही कारण है कि इस माह हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिलाएं बेतवा में स्नान कर सुंदर रंगोलियां सजाकर वहां पर भगवान का तुलसी दल आदि से पूजन करती हैं। कार्तिक माह के अंतिम पांच दिन जिन्हें पचवीका कहा जाता है, उस समय स्नानार्थियों की संख्या कई गुना अधिक बढ़ जाती है, इसी दौरान उज्जैन में क्षिप्रा दी तर्ज पर यहां पर पंच दिवसीय बेतवा महोत्सव शुरू हो जाता है जिसमें बेतवा का दुग्ध अभिषेक सहित घाटों पर को विद्युत रोशनी और दीपकों से रोशन किया जाता है।
यदि नदी में मिलने वाला पानी घरेलू सीवेज या मल-मूत्र से दूषित है, तो इससे नदी के पानी में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे पानी में स्नान करने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विशेषज्ञ डा संजय सिंह किरार के अनुसार गैस्ट्रोएंटेराइटिस दूषित पानी गलती से मुंह के रास्ते शरीर में जाने पर उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार हो सकता है।
दूषित पानी निगलने पर लंबे समय तक बुखार और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। बैक्टीरिया या परजीवियों से दूषित पानी के कारण दस्त में खून और पेट में ऐंठन हो सकती है। दूषित पानी मुंह के रास्ते शरीर में जाने पर पीलिया, थकान, मतली और लिवर में सूजन हो सकती है।
त्वचा में खुजली, चकत्ते और आंखों में जलन या संक्रमण का खतरा हो सकता है। पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों के कारण, विशेषकर कान में पानी जाने पर, बाहरी कान में संक्रमण हो सकता है। यदि पानी में पशुओं का मूत्र मिला हो, तो कुछ परिस्थितियों में लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी का भी खतरा हो सकता है।