
नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। खेती में नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करने के लिए किसानों की निर्भरता यूरिया पर है। लेकिन अब इसके विकल्प के रूप में तरल अमोनिया के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके प्रयोग के लिए प्रदेश के पांच जिलों के 1250 एकड़ खेतों को चिह्नित किया गया है। सोमवार को विदिशा जिले के मानोरा गांव में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। यहां 250 से 300 एकड़ खेतों में इसका प्रयोग करने की योजना है।
जानकारी के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने हरियाणा, पंजाब में इसी साल अमोनिया को यूरिया के विकल्प के रूप में परखने के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू की थी। इस प्रयोग का विस्तार मध्य प्रदेश में भी हो रहा है।
कृषि विभाग के उप संचालक सचिन जैन का कहना है कि विदिशा, रायसेन, सीहोर, देवास और भोपाल जिले के 1250 एकड़ खेतों में तरल अमोनिया का पहली बार प्रयोग किया जाएगा। एग्रोनामी विज्ञानी रविंद्र धाकड़ का कहना है कि इसका खर्च यूरिया खाद के बराबर ही पड़ेगा। अभी तो यह निश्शुल्क प्रदर्शन है, लेकिन आने वाले समय में यह सुविधा राज्य सरकार के माध्यम से ही उपलब्ध होगी।
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कृषि अधिकारियों के अनुसार, 100 किलो यूरिया के छिड़काव पर जमीन को 46 प्रतिशत नाइट्रोजन मिलता है। वहीं तरल अमोनिया में करीब 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। कृषि विज्ञानी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि इसके उपयोग से जमीन में नाइट्रोजन की पर्याप्त पूर्ति हुई, पैदावार भी दस से पंद्रह फीसद तक बढ़ी है।
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