Shradh Paksha 2022: गरीबों के पूर्वज और अज्ञात मृतकों का भी होगा तर्पण और श्राद्ध
Shradh Paksha 2022: विदिशा शहर के समाजसेवियों ने की पहल, पितृ सेवा के लिए जुटाई जा रही जानकारी। ...और पढ़ें
By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Fri, 09 Sep 2022 07:38:50 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Sep 2022 09:29:21 AM (IST)

Shradh Paksha 2022: राजेंद्र शर्मा, विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा शहर के समाजसेवियों का एक समूह पितृपक्ष में अनोखी पहल करने जा रहा है। समूह ऐसे गरीब लोगों की जानकारी जुटा रहा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपने मृतक पूर्वजों का तर्पण और श्राद्ध करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा अज्ञात मृतकों की थानों से जानकारी जुटाई जा रही है। इन मृतकों की आत्माओं की शांति के लिए रोज 16 दिन जरूरतमंद लोगों को कच्छी धर्मशाला में श्राद्ध भोजन कराया जाएगा।
शहर की बेतवा उत्थान समिति से जुड़ा यह समाजसेवियों का समूह पिछले तीन साल से जरूरतमंद लोगों को जन सहयोग से रोज भोजन कराता आ रहा है। हर दिन 100 से अधिक गरीब और जरूरतमंद लोग भोजन करते हैं। इस बार समूह ने तय किया है कि ऐसे लोगों का श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा जिनका गरीबी के कारण उनके स्वजन श्राद्ध नहीं कर पाते। इसके लिए वाट्सएप ग्रुप, इंटरनेट मीडिया और व्यक्तिगत रूप से लोगोंं से संपर्क कर जानकारी जुटाई जा रही है। अभी तक समूह के पास 70 लोगों के नाम आए हैं।
प्रयास किया जा रहा है कि मृतकों की तारीख, माह और मिल जाए तो तय तारीख पर उनकी श्राद्ध की जा सके। समूह प्रमुख अतुल शाह और हितेद्रसिंह रघुवंशी बताते हैं कि ज्ञात लोगों का श्राद्ध रोज कच्छी धर्मशाला में किया जाएगा और अज्ञात लोगों का सर्व पितृमोक्ष अमावस्या के मौके पर बेतवा में तर्पण करके सामूहिक श्राद्ध किया जाएगा।
यहां भी निश्शुल्क तर्पण और पिंडदान कराए जाएंगे
गायत्री प्रजापीठ द्वारा स्वर्णकार कालोनी में सामूहिक श्राद्ध तर्पण पिण्डदान निश्शुल्क कराया जाएगा। यहां पर गरीब, अमीर सभी लोग आकर तर्पण कर सकेंगें। पीठ से जुड़े सौरभ गुप्ता ने बताया कि सुबह साढ़े सात से नौ बजे तक प्रतिदिन मंदिर परिसर में तर्पण कराया जाएगा। तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान में लगने वाली सामग्री गायत्री परिवार द्वारा निश्शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। जिन लोगों के अभी तक पिंडदान नहीं हुए, उनके भी पिंडदान कराए जाएंगे।
इनका कहना है
सनातन धर्म में मृत आत्माओं की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध बताया गया है। जिनके कोई संतान नहीं है, अथवा गरीबी के कारण नहीं कर पा रहे उनका श्राद्ध कोई समूह करा रहा है तो यह सराहनीय प्रयास है। इससे आत्माएं तृप्त होंगी।
- संजय पुरोहित, प्रदेशाध्यक्ष मप्र प्रांतीय पुजारी महासभा