
नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। आश्विन माह की शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर विदिशा नगर में धर्म और भक्ति का अद्भुत उत्सव शुरू हो चुका है। रविवार (11 अक्टूबर 2026) को शुभ मुहूर्त में कलश/घटस्थापना के साथ ही शहर के 150 से अधिक स्थानों पर सजे भव्य और आकर्षक पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की जाएंगी।
इस साल विदिशा का नवरात्रि उत्सव श्रद्धालुओं के लिए एक नया और विहंगम रूप लेकर आ रहा है। सालों से स्थापित होती आ रही पारंपरिक 4 और 6 भुजाओं वाली प्रतिमाओं के स्थान पर इस बार मैया 8, 10 और 12 भुजाओं के विशाल व अलौकिक स्वरूप में दर्शन देंगी।
मूर्तिकारों ने इस बार प्रतिमाओं की बनावट, ऊंचाई और विस्तार में बड़ा बदलाव किया है। प्रतिमाओं का कद 2 फीट तक बढ़कर 18 फीट तक पहुंच गया है, वहीं उनका विस्तार भी 6 से 18 फीट तक हो गया है। कोलकाता से आए सिद्धहस्त कलाकारों और स्थानीय मूर्तिकारों ने पिछले तीन महीनों से इन विशाल प्रतिमाओं को तराशा है। 8 से 12 भुजाओं की जटिल बनावट के कारण मूर्तिकार रोजाना 15 घंटे काम करते रहे।
मूर्तिकार बबलू के अनुसार इस साल 5 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं, जिनमें 8 से 12 भुजाओं वाली दुर्गा प्रतिमाओं और मां काली के विशाल रूपों की सबसे ज्यादा मांग रही।
आयोजन के पहले दिन शहर की सड़कों पर लगने वाले भारी जाम और अव्यवस्था से बचने के लिए इस बार पूजा समितियों ने नई रणनीति अपनाई है। नवरात्रि के पहले दिन का इंतजार करने के बजाय बड़ी मूर्तियों को 2 से 3 दिन पहले ही सुरक्षित रूप से पंडालों तक पहुंचा दिया गया।
करैयाखेड़ा रोड और बांसकुली में स्थापित होने वाली मां काली की 18 फीट ऊंची विशालकाय प्रतिमा को शुक्रवार को ही ट्राले और बुलडोजर की मदद से पंडाल तक पहुंचाया गया।
समिति अध्यक्ष रितिक जैन ने बताया कि एन वक्त पर मूर्ति ले जाने से रास्ते में ट्रैफिक जाम होता है। समय रहते मूर्ति पहुंचने से पंडाल को भी प्रतिमा की सटीक लंबाई-चौड़ाई के हिसाब से सुरक्षित तैयार कर लिया गया है।
शहर के दुर्गा नगर चौराहे के समीप इस साल पांच देवियों के स्वरूपों को एक साथ स्थापित किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहेगा। नगर के सभी 150 से अधिक पंडालों में आकर्षक विद्युत सज्जा, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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