
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पर्यटन के नक्शे पर शहर तेजी से उभरकर आ रहा है। इसका कोई एक कारण नहीं, पर सबसे बड़ी वजह है इसका उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू, महेश्वर, गांधी सागर जैसे पर्यटन स्थलों के बीच बसा होना। इस शहर में अब पर्यटक केवल मेडिकल टूरिज्म की वजह से ही नहीं आ रहे बल्कि धर्म-अध्यात्म, खानपान, शिक्षा, स्वच्छता और कारोबार के कारण भी आकर्षित हो रहे हैं।
बीते तीन सालों में शहर में आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। अच्छी बात तो यह है कि कुल पर्यटकों में से पांच से सात प्रतिशत पर्यटक विदेशी हैं। यहां आने वाले पर्याटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब पर्यटन विभाग ने स्थानीय कला और खानपान को भी प्रचारित करना शुरू कर दिया है।
इससे यहां की अलग ही पहचान बनने लगी है। इसके अलावा यहां आने वाले मेहमानों को यहां की संस्कृति से परिचित कराने के लिए मालवा-निमाड़ के लोकगीत-लोकनृत्य की प्रस्तुति दी जा रही है। पर्यटन विभाग के इंदौर रीजन में शामिल पर्यटन स्थल उज्जैन, मांडू, ओंकारेश्वर, महेश्वर, गांधी सागर और झाबुआ में पर्यटकों को यहां की संस्कृति से रूबरू कराने का प्रयास अब रंग भी आने लगा है।
यहां आने वाले पर्यटक केवल अब यहां के पर्यटन स्थलों का ही आनंद नहीं ले रहे बल्कि यहां की कलाकृतियों, लोक संस्कृति, जीवनशैली और स्थानीय आहार का भी लुत्फ ले रहे हैं।
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पर्यटन विभाग के रिसोर्ट में पारंपरिक पद्धति से व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इसके तहत गांधी सागर में अगर अफीम की भाजी परोसी जा रही है, तो मांडू में दाल-पानिये और हेरिटेज वाइन। झाबुआ में कड़कनाथ का पर्यटक लुत्फ ले रहे हैं, तो उज्जैन में दाल-बाफला खिलाया जा रहा है।
इन प्रमुख व्यंजनों के अलावा स्थानीय अन्य व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं। इन व्यंजनों को बनाने के लिए कुछ स्थानों पर तो स्थानीय लोगों को ही नियुक्त किया गया है जो पारंपरिक परिधान में और पारंपरिक पद्धति से भोजन बना रहे हैं। इसके लिए लाइव किचन पद्धति अपनाई गई है जहां पर्यटक पारंपरिक भोजन बनते हुए देख भी सकते हैं।
पर्यटन विभाग के होटल में कलाकृतियों के माध्यम से भी प्रदेश की संस्कृति की ब्रांडिंग हो रही है। झाबुआ में पर्यटकों को आदिवासी गुड़िया, तीर-कमान दिखाए जाते हैं तो महेश्वर में महेश्वरी बुनकारी के बारे में बताया जाता है।
मांडू में कलाकार अनिल नाहर द्वारा तार से बनाई जाने वाली कलाकृतियां विक्रय के लिए रखी गई हैं। इसी तरह गांधीसागर में गौंड पेंटिंग पर्यटकों को लुभा रही है।
मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम इंदौर के क्षेत्रीय प्रबंधक अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि मालवा-निमाड़ के पर्यटन स्थलों की सैर करने आने वालों को अब यहां की संस्कृति-सभ्यता से अवगत कराने के लिए बीते कुछ समय से प्रयास किए जा रहे हैं जिसका सकारात्मक परिणाम मिल रहा है।
मांडू, उज्जैन और ओंकारेश्वर में किए गए प्रयोग में जब कोई बड़ा समूह आता है तो उनके मनोरंजन के लिए स्थानीय कलाकारों को प्रस्तुति देने बुलाया जाता है। इसके अलावा लाइव किचन भी शुरू किया है जहां देशी व्यंजन बनते पर्यटक देख सकते हैं और उनका स्वाद भी ले सकते हैं। इसके माध्यम से कोशिश यही की जा रही है कि यहां की कला-संस्कृति के बारे में मेहमान करीब से जान सकें।
पर्यटन विभाग के मार्केटिंग मैनेजर श्याम तिवारी बताते हैं कि बीते तीन वर्षों में मालवा-निमाड़ घूमने के लिए शहर में आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत बढ़त हुई है। कुल पर्यटकों में से पांच से सात प्रतिशत विदेशी हैं। उज्जैन और ओंकारेश्वर में हुए विकास कार्य का सबसे ज्यादा लाभ इंदौर को हो रहा है। इसके अलावा आवागमन की नजर से इंदौर बेहतर है इसलिए पर्यटक यहां ज्यादा आ रहे हैं।