Health Tips: आयुर्वेद के अनुसार माइग्रेन को शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) में असंतुलन का कारण माना जाता है। माइग्रेन के लिए आयुर्वेदिक उपचार इन दोषों को संतुलित करने और स्थिति के मूल कारण पर केंद्रित है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डा. शुभम जैन के अनुसार माइग्रेन के लिए कुछ सामान्य आयुर्वेदिक उपचार आजमाए जाते हैं। परंतु यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आयुर्वेदिक उपचार हमेशा एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए। आयुर्वेदिक उपचार कर माइग्रेन को ठीक किया जा सकता है। बशर्ते इसमें मरीज को समय के साथ विश्वास और दृढ़ निश्चयी भी होना पड़ेगा।
1. शिरोधारा: यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा है जिसमें गर्म तेल या हर्बल काढ़े को माथे पर एक स्थिर धारा में डालना शामिल है। यह दिमाग को शांत करने, तनाव कम करने और सिरदर्द दूर करने में मदद कर सकता है।
2. नास्य: इसमें नासिका के माध्यम से हर्बल तेल या काढ़े का प्रशासन शामिल है। यह थैरेपी नाक के मार्ग को खोलने और साइनस की भीड़ से राहत देने में मदद करती है, जो माइग्रेन के लिए ट्रिगर हो सकती है।
3. आयुर्वेदिक आहार: अपने दोषों के अनुरूप आयुर्वेदिक आहार का पालन करने से माइग्रेन को रोकने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए, पित्त असंतुलन वाले लोगों को मसालेदार भोजन से परहेज करने से लाभ हो सकता है, जबकि वात असंतुलन वाले लोगों को अपने आहार में अधिक गर्म, पिसे हुए खाद्य पदार्थों को शामिल करने से लाभ हो सकता है।
4. हर्बल उपचार: ब्राह्मी, अश्वगंधा और शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग दोषों को संतुलित करने और माइग्रेन से राहत दिलाने में मदद के लिए किया जा सकता है।
5. योग और ध्यान: योग और ध्यान का नियमित अभ्यास मन को शांत करने, तनाव कम करने और दोषों को संतुलित करने में मदद कर सकता है, ये सभी माइग्रेन को रोकने में मदद कर सकते हैं।