Brain Stroke : ब्रेन अटैक मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति की कमी हो जाने के कारण होता है। रक्त आपूर्ति करने वाली आर्टरी में ब्लॉकेज हो जाने के कारण ऐसा होता है। यह ब्लॉकेज शरीर में कहीं भी रक्त का थक्का बन जाने से हो सकता है, जो धीरे-धीरे मस्तिष्क की आर्टरी तक पहुंच जाता है और व्यवधान पैदा करता है। वसा की अधिकता के कारण रक्‍त नलिका (आर्टरी) संकीर्ण हो जाती है जिससेयह व्यवधान या ब्लॉकेज पैदा होता है। हेमोरेजिक यानी मस्तिष्क में खून की नली फट जाने से जो ब्रेन अटैक होता है उसकी मुख्य वजह अनियंत्रित हाइपरटेंशन होता है। इसी के साथ धमनियों की कमजोर दीवारों में दरार होना विकृत रक्त नलिकाओं के फूलकर गुब्बारा बन जाना जैसे कई अन्य कारक भी होते हैं।

स्ट्रोक के लक्षण स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण और संकेत हैं

1. चेहरे, बांह, पैर (खासकर शरीर के एक तरफ) में अचानक संवेदन शून्यता या कमजोरी पैदा हो जाना।

2. अचानक भ्रम की स्थिति, बोलने या किसी बात को समझने में दिक्कत।

3. एक या कभी-कभी दोनों आंखों से देखने में दिक्कत आने लगती है।

4. चलने में अचानक तकलीफ होना, चक्कर आना, संतुलन या समन्वय का अभाव हो जाना।

5. मस्तिष्क में खून का रिसाव होने की वजह से अचानक भयंकर सिरदर्द होने लगता है। इसके साथ ही उल्टी आना, दौरा पड़ना या मानसिक चेतना का अभाव जैसी शिकायतें भी होती हैं। इन मामलों में चिकित्सक नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैनिंग तत्काल कराने की सलाह देते ह

कितनी खतरनाक है यह बीमारी?

स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क में नुकसान से पूरा शरीर प्रभावित हो सकताहै- जिसके परिणामस्वरूप आंशिक से लेकर गंभीर विकलांगता तक आ सकती है। इनमें पक्षाघात, सोचने, बोलने मे परेशानी और भावनात्मक समस्याएं शामिल हैं। कई रिस्क फैक्टर्स हो सकते हैं :- उम्र बढ़ने के साथ ही खतरा भी बढ़ता जाता है। पुरुषों में स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। पश्चिमी देशों की तुलना में इंडोएशियाई निवासियों में स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। पारिवारिक पृष्ठभूमि भी स्ट्रोक और हृदय रोग में अहम भूमिका निभाती है।

1.हाइपर टेंशन

2. हार्ट डिसीज

3. कैरोटिड आर्टरी डिसीज

4. हाई कोलेस्ट्रोल लेवल

5. स्मोकिंग एंड एल्कोहल ड्रिंकिंग हैबिट

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए कई शोध अध्ययनों के कारण अब ऐसी औषधियां मिलने लगी हैं जिनसे स्ट्रोक को होने से पहले ही रोका जा सकता है। स्ट्रोक से होने वाली क्षति को भी नियंत्रित करके कम से कम किया जा सकता है।

डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा डायरेक्टर,न्यूरो एंड स्पाइन, सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली

Posted By: Navodit Saktawat

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