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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Hello Doctor : साइलेंट किलर है किडनी की बीमारी, बीपी-शुगर है तो सावधान हो जाएं

Hello Doctor : नईदुनिया के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में किडनी रोग विशेषज्ञ डा. अनिल जैन ने दिए पाठकों के सवालों के जवाब

By Dheeraj BajpaihEdited By: Dheeraj Bajpaih
Publish Date: Thu, 30 Mar 2023 11:21:30 AM (IST)Updated Date: Thu, 30 Mar 2023 11:21:30 AM (IST)
Hello Doctor : साइलेंट किलर है किडनी की बीमारी, बीपी-शुगर है तो सावधान हो जाएं

Hello Doctor : जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थाें व विषैले कचरे को बाहर निकालने, खून के शुद्धिकरण कुल मिलाकर शरीर से स्वच्छ व स्वस्थ रखने में किडनी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए कहा जाता है कि किडनी यानी गुर्दा शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। निरंतर कार्य करते हुए किडनी शरीर के अपशिष्ट पदार्थाें को पेशाब द्वारा बाहर निकालती है। क्रिएटनिन और यूरिया शरीर के दो महत्वपूर्ण अपशिष्ट पदार्थ हैं। रक्त में इनकी मात्रा बढ़ने पर किडनी खराब होने का खतरा रहता है।

खास बात यह है कि अधिकांश काे किडनी की बीमारी का पता तब चलता है जब वे पूरी तरह बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए किडनी रोगों को साइलेंट किलर कहा गया है। बीमारियों की समय पर पहचान कर किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है। 40 वर्ष से अधिक के लोगों खासकर जो ब्लडप्रेशर (बीपी) व डायबिटीज (शुगर) की चपेट में हैं उन्हें अनिवार्य रूप से वर्ष में कम से कम एक बार सेहत का परीक्षण कराना चाहिए। ताकि किडनी रोगों को शुरुआती दौर में ही चिंहित कर निवारण किया जा सके। नईदुनिया के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में उक्त बातें शहर के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डा. अनिल जैन ने कहीं। नईदुनिया कार्यालय पहुंचे डा. जैन से पाठकों ने फोन पर चर्चा कर शंका का समाधान किया। जबलपुर सहित कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, मंडला, डिंडौरी जिलों व छत्तीसगढ़ के पाठकों ने फोन पर चर्चा की।


80 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं खतरा-

किडनी रोग विशेषज्ञ डा. जैन ने कहा कि सेहत के प्रति जागरूकता 80 प्रतिशत तक किडनी रोगों का खतरा कम कर सकती है। शुरुआती दौर में बीमारी का पता न चल पाने के कारण तमाम लोग खराब किडनी लेकर डाक्टर के पास पहुंचते हैं। जिसके बाद डायलिसिस ही एकमात्र उपाय बचता है। इसलिए वर्ष में कम से कम एक बार यूरिन रूटीन, ब्लड यूरिया, सीरम क्रिएटनिन, ब्लड शुगर, सीबीसी की जांच करवाते हुए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इन जांचों के माध्यम से काफी हद तक किडनी रोगों का पता चल जाता है। रिपोर्ट में कोई कमी सामने आने पर डाक्टर किडनी की सोनोग्राफी कराने की सलाह दे सकते हैं।

स्वयं बिगाड़ रहे जीवनशैली-

किडनी रोगों के लिए बिगड़ती जीवनशैली भी जिम्मेदार है। डा. जैन ने कहा कि फास्ट फूड का बढ़ता चलन, मोबाइल, टीवी व कंप्यूटर तक सीमित होती दिनचर्या लोगों की स्वयं की आदत है। लोग खुद ही अपनी जीवनशैली बिगाड़कर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पहले बच्चे खेलकूद में सक्रिय रहते थे परंतु अब वे भी मोबाइल व टैब तक सीमित होते जा रहे हैं। स्कूल, कोचिंग, पढ़ाई व मोबाइल में जीवन सिमटकर रह गया है। शारीरिक श्रम के अभाव में उन्हें भी तरह-तरह की बीमारियां घेर रही हैं, जो बाद में किडनी रोगों का कारण बन जाती है। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों की तुलना में किडनी रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

मनमर्जी से न खाएं दर्द की दवा-

दर्द निवारक दवाएं भी किडनी खराब कर देती हैं। डा. जैन ने कहा कि शरीर में कहीं दर्द होने पर तमाम लोग चिकित्सीय परामर्श के बगैर दर्द की दवाओं का सेवन करते हैं। दवा दुकानों से ओवर द काउंटर दवाएं लेकर दर्द को ठीक करने की कोशिश करते हैं। यह स्थिति घातक हो सकती है। इसलिए दर्द निवारक दवाएं मर्जी से नहीं लेनी चाहिए। धूम्रपान बंद करते हुए संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए। मांसाहार, शराब से दूर रहते हुए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन व कम मात्रा में नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।

सवाल-किडनी की बीमारी से कैसे बचें। स्वस्थ हैं तब भी किडनी की जांच करानी चाहिए।

वीरेंद्र नामदेव

जवाब-यदि बीपी व शुगर है तो किडनी की बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। किडनी रोगों से बचाव का सबसे आसान उपाय है कि साल में कम से कम एक बार सेहत की जांच अवश्य कराएं। चूंकि किडनी रोग का पता शुरुआती दौर में नहीं चल पाता। इसलिए यदि स्वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं तब भी किडनी की जांच करानी चाहिए।

सवाल-किडनी रोगों के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं। लक्षण सामने आने पर क्या करना चाहिए।

सुजान सिंह

जवाब-किडनी रोगों के प्रारंभिक लक्षण सामने नहीं आते हैं। किडनी जब 70 प्रतिशत तक खराब हो जाती है तब बीमारी का पता चल पाता है। तब भूख न लगना, पेशाब कम होना या बार-बार पेशाब होना, खून बनना बंद होना, महिलाओं में माहवारी में अनियमितता, कमजोरी, थकान, भूख कम लगना, सांस फूलना आदि मुख्य लक्षण हैं। लक्षण सामने आते ही बिना देर किए चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।

सवाल-मुझे ब्लडप्रेशर रहता है, कभी कभी किडनी में संक्रमण हो जाता है, हीमोग्लोबिन बढ़ गया है, कोई उपाय बताएं।

अजय कुमार

जवाब-ब्लडप्रेशर व शुगर किडनी रोगों की मुख्य वजह में शामिल है। इसलिए किडनी की सोनोग्राफी व यूरिन की जांच करवाते हुए विशेषज्ञ से परामर्श लें। यूरिन की रिपोर्ट में संक्रमण का पता चले तो उसका कल्चर कराएं। हीमोग्लोबिन बढ़ गया है तो आयरन की गोली का सेवन बंद कर दें।

सवाल-झुकने पर कमर दर्द होता है, कहीं किडनी की बीमारी तो नहीं हो रही।

रोहन कुमार

जवाब-कैल्शियम, विटामिन की कमी के कारण भी दर्द हो सकता है। किडनी का दर्द एक तरफ होता है, जो नीचे की तरफ मरोड़ देकर आता है। इस तरह का दर्द किडनी की बीमारी प्रतीत नहीं होती फिर भी एहतियात के तौर पर जांच करा लेना चाहिए।

सवाल-मैं सप्ताह में तीन दिन शराब का सेवन करता हूं, शराब के कारण किडनी खराब हो सकती है क्या।

दिवाकर

जवाब-शराब का असर लिवर पर पड़ता है न की किडनी पर। परंतु यदि लिवर में खराबी आई तो उसका असर किडनी पर पड़ सकता है। बेहतर होगा कि आप शराब का सेवन बंद कर दें। या फिर 30 एमएल से अधिक मात्रा में शराब का सेवन न करें।