Alzheimer: बदलती जीवनशैली और खानपान की वजह से अल्जाइमर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीन साल की स्थिति की बात करें तो मरीजों में 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। यह याददाश्‍त कमजोर होने व भूलने की बीमारी है। 55 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में यह समस्या देखी जाती है। इसमें सोचने की शक्ति कम होती है। अनुवांशिक समस्या के साथ ही जीवनशैली व खानपान में अनियमितता इसकी मुख्य वजह है। अमेरिका स्थित वाशिगटन यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने नए अध्ययन में इस बात का पता लगाया कि मस्तिष्क के कुछ खास हिस्सों को अल्जाइमर बीमारी क्यों नुकसान पहुंचाती है। एपीओई जीन को अल्जाइमर बीमारी के लिए आनुवंशिक जोखिम कारक माना जाता है।

यह पाया गया शोध में

शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क के जिस क्षेत्र में एपीओई जीन ज्यादा सक्रिय होता है, उसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। 16 नवंबर को साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन निष्कर्ष यह समझने में मदद करता है कि कभी-कभी अल्जाइमर के लक्षणों में अंतर क्यों होता है। साथ ही यह अध्ययन अल्जाइमर के जैविक तंत्र पर भी प्रकाश डालता है। अल्जाइमर के कुछ दुर्लभ व असामान्य रूप हैं, जिनमें लोगों में स्मृति समस्याओं के बजाय पहले भाषा या ष्टि संबंधी समस्याएं विकसित होती हैं। बीमारी के अध्ययन के दौरान ऐसे लोगों पर कभी गौर नहीं किया गया।

क्‍या है अल्‍जाइमर और इसके लक्षण

इसमें मरीजों की स्मरण शक्ति कम होना, परिचित कार्य करने में कठिनाई, समय-स्थान भुलना, चीजों को याद रखने में समस्या, चित्रों और स्थानीय संबंधों से परेशानी, व्यवहार में परिवर्तन आदि मुख्य वजह है। मानसिक समस्या जैसी लगने वाली यह बीमारी का इलाज बेहद जरूरी है। समय पर इलाज ना मिलन से बीमारी काफी बढ़ जाती है, जिसके बाद इलाज संभव नहीं हो पाता है। स्मृति लोप अल्जाइमर रोग की प्रारंभिक पहचान है, जिसके बाद पीड़ित में दुविधा व सोचने-समझने में परेशानी जैसे लक्षण भी सामने आते हैं। ये मस्तिष्क ऊतकों के नष्ट होने के लक्षण हैं। विषाक्त प्रोटीन क्लस्टर पहले मस्तिष्क के टेंपोरल लोब में फैलता है, जो स्मृति क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसके बाद वह मस्तिष्क के उस क्षेत्र में विस्तार लेता है, जो सोचने व नियोजन के लिए आवश्यक है।

इस तरह करें बचाव

शारीरिक व मानसिक रूप से भी खुद को स्वस्थ रखें। नियमित जीवनशैली व सही आहार लें। नकारात्मक विचारों को अपने मन पर हावी न होने दें। पसंद का संगीत सुनें, गाना गाने, खाना बनाने, बागवानी करें। पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें, ब्लड प्रेशर व शुगर नियंत्रित रखें।

Posted By: Navodit Saktawat

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