Nosocomial Infections। अस्पताल में भर्ती होने के बाद या अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटों के बाद किसी भी मरीज को संक्रमण होते हैं, उन्हें अस्पताल में होने वाले संक्रमण (HAI) या नोसोकोमियल इन्फेक्शन्स कहा जाता है। किसी भी मरीज के स्वास्थ्य पर इन संक्रमणों (HAI) का गंभीर असर पड़ सकता है, इसीलिए इन्फेक्शन ट्रैकिंग और सर्वेलंस सिस्टम्स से लैस होने के साथ-साथ संक्रमण के रोकथाम के उपाय जहां लागू किए गए हैं, ऐसे अस्पताल मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहतर होते हैं।

ऐसे मरीजों को ज्यादा खतरा

मधुमेह, हाइपरटेन्शन, ऑटोइम्यून और गुर्दे की बीमारी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं जिन्हें पहले से हैं, ऐसे मरीजों में इम्युनिटी काफी कमजोर होती है, अस्पताल में होने वाले संक्रमणों की चपेट में आने का खतरा उन्हें ज्यादा होता है। जिन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या जिनमें पहले से कई बीमारियां हैं, जिन्हें बार-बार स्वास्थ्य सुविधाओं में ले जाना पड़ता है, आईसीयू में या वेंटीलेटर पर रखे गए मरीज, या जिन पर इन्वेसिव प्रोसिजर की गयी है या इनड्वेलिंग डिवाइस लगाए गए हैं उन्हें अस्पताल में होने वाले संक्रमणों का खतरा होता है।

अस्पताल में होने वाले संक्रमणों में सेंट्रल लाइन से होने वाले रक्त संक्रमण, कैथेटर से होने वाले मूत्र पथ के संक्रमण, सर्जिकल साइट पर होने वाले संक्रमण, वेंटीलेटर से निमोनिया और क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण शामिल हैं। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से पता चला है कि ICU में भर्ती लगभग 19.5 फीसदी मरीजों में कम से कम एक संक्रमण अस्पताल से प्राप्त हुआ था।

Nosocomial Infections पर ऐसे करें नियंत्रण

अस्पताल में होने वाले संक्रमणों से कई मरीज बीमार हो सकते हैं और उनकी मृत्यु दर भी काफी ज्यादा होती है, इसलिए मरीज को HAI का खतरा जहां-जहां हो सकता, उन सभी प्रोसिजर्स की निगरानी करने के लिए आवश्यक सभी नियम और दिशानिर्देश स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों के पास होने चाहिए। मरीजों और स्वास्थ्य सेवा करने वालों के बीच संक्रामक एजेंट्स के ट्रांसमिशन को रोकना, सेन्ट्रल लाइन्स और कॅथेटर्स की निगरानी और संक्रमित मरीजों को अलग रखना आदि उपाय इसमें शामिल हैं।

कैथेटर लगाने जैसे काम करते समय संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं को करने का प्रशिक्षण सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए, जैसे कि हाथ धोना, असेप्टिक टेक्निक्स को अपनाना आदि। संक्रमित मरीज़ों का सबसे पहला संपर्क नर्सिंग स्टाफ के साथ होता है, एचएआई के नियंत्रण में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और संक्रमण की रोकथाम के नियमों का पालन किया जा रहा है यह सुनिश्चित करना, एचएआई को नियंत्रित करने की किसी भी रणनीति के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

अस्पतालों में कमरों का समय-समय पर डिसइन्फेक्शन किया जाना चाहिए और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए। एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोगसिद्ध उपयोग यह एक ऐसा पहलू है जिसका महत्त्व काफी बढ़ रहा है। इससे एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवों के विकास को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

अस्पताल के बाहर से जिस संक्रमण के साथ मरीज़ अस्पताल में भर्ती किए गए हैं उनका प्रसार दूसरे रोगियों में होने से रोकने में आईसीयू में बनाए गए आइसोलेशन रूम मदद कर सकते हैं। कोविड, एच1एन1, टीबी और इस तरह की अन्य बीमारियां इसमें शामिल हैं।

कई अस्पतालों ने बनाई है इन्फेक्शन कंट्रोल कमिटी

इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर यूनिट के कंसल्टेंट डॉ. त्रिशला सिंघवी का कहना है कि आज देश के कई प्रमुख अस्पतालों में इसकी रोकथाम के लिए विशेष इन्फेक्शन कंट्रोल कमिटी होती है, जो सभी इन्फेक्शन कंट्रोल प्रोग्राम और पॉलिसियों की देखरेख करती है और उन पर अमल करती है। डॉ. त्रिशला सिंघवी का कहना है कि इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में संक्रमण नियंत्रण नियमावली में निर्धारित सभी सख्त नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

ऑनसाइट प्रशिक्षण और शिक्षा के ज़रिए सभी कर्मचारियों को संक्रमण नियंत्रण में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ICU में काम करने नर्सों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी यह प्रशिक्षण दिया जाता है। इस हॉस्पिटल में एक स्ट्रक्चर्ड प्रोग्राम का पालन किया जाता है, जिसमें संक्रमण नियंत्रण प्रथाओं के बारे में प्रशिक्षण के साथ-साथ व्याख्यान, ऑडियो और वीडियो शामिल हैं। यह प्रशिक्षण नियमित अंतराल पर दिया जाता है।

डॉक्टरों सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों को किसी के भी साथ संपर्क करते हुए सावधानी बरतनी होती है, यानी वे किसी भी मरीज़ को हाथों को डिसइन्फेक्ट किए बिना या ग्लोव या दूसरे एंटी-इन्फेक्शन गियर पहने बिना नहीं छू सकते हैं। एक "आउटकम इंडिकेटर" पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और नियंत्रण नीतियों के कार्यान्वयन को ट्रैक करता है।

मल्टी-रेसिस्टेंट बैक्टीरियल स्ट्रेन्स पैदा हो रहे हैं, अब अस्पतालों को अस्पताल में होने वाले संक्रमणों को नियंत्रित करने और रोकने पर ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है। डॉ. त्रिशला सिंघवी का कहना है कि इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में हम अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं। हमने एक सुव्यवस्थित संक्रमण नियंत्रण प्रणाली कार्यान्वित की है जो एचएआई की जोखिम को कम करती है, मरीज को मिलने वाले परिणामों में सुधार करके उन्हें लाभान्वित करती है।

Posted By: Sandeep Chourey

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