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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जानवरों से भी MPox फैलने का खतरा... बुखार, सिरदर्द सहित 5 लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान

अफ्रीका के बाद मंकी पॉक्स के मामले दुनियाभर में सामने आने लगे हैं। भारत सरकार भी अलर्ट हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एमपॉक्‍स जानवरों से इंसानों...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Mon, 26 Aug 2024 07:53:38 AM (IST)Updated Date: Tue, 27 Aug 2024 08:00:00 AM (IST)
जानवरों से भी MPox फैलने का खतरा... बुखार, सिरदर्द सहित 5 लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
दुनियाभर में मंकी पॉक्‍स का खतरा।

HighLights

  1. जानवरों के काटने पर हो सकता है एमपॉक्‍स
  2. खरोंचने के कारण भी एमपॉक्‍स का है खतरा
  3. वायरस नाक-मुंह से शरीर में करता है प्रवेश

हेल्‍थ डेस्‍क, इंदौर (Mpox Virus Symptoms)। मंकी पॉक्स को पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी (Public Health Emergency) घोषित किया था। भारत सरकार भी इसको लेकर अलर्ट है। देशभर के एयरपोर्ट पर इसको लेकर विशेष निगरानी की जा रही है। वहीं, एक्सपर्ट्स की मानें तो मंकी पॉक्स (MPox) जानवर से फैलने का खतरा रहता है।

पशुओं से फैलता है वायरस

इंदौर के सीएमएचओ बीएस सैत्‍या के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस पशुओं से मनुष्य में और मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकता है। संक्रमित पशु द्वारा काटने, खरोंचने या शरीर के घाव के सीधे संपर्क में आने के कारण हो सकता है।


मंकीपॉक्स वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड सामान्‍य तौर पर 7 से 14 दिन तक हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के चकत्ते दिखने से एक-दो दिन पहले तक रोग फैल सकता है। सभी चकत्तों से पपड़ी गिर न जाए, रोगी तब तक संक्रामक बना रह सकता है। यह वायरस कटी-फटी त्वचा, नाक और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।

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क्या है लक्षण

  • बुखार
  • सिर दर्द
  • चकत्ते
  • कमजोरी
  • लिम्फ नोड्स में सूजन

अफ्रीका में मिले थे केस

गौरतलब है कि एमपॉक्‍स के पहले मामले अफ्रीका में सामने आए थे। इसके अलावा स्वीडन और पाकिस्तान में भी मंकी पॉक्स के मामले देखे गए थे।

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दो टीकों की ले रहे मदद

एमपॉक्स वायरस से निपटने के लिए डब्‍ल्‍यूएचओ फिलहाल दो प्रकार के टीकों की मदद ले रहा है। डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख ने एमपॉक्स वैक्सीन बनाने वाली कपंनियों से अधिक उत्पादन करने की अपील की थी, ताकि निम्न आय वाले देशों में भी वैक्सीन पहुंचाई जा सके।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा गया है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा डॉक्टर्स की सलाह जरूर लें। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।