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PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त से पहले किसानों के लिए खुशखबरी, अब मिलेगा इसका लाभ, पढ़ें पूरी खबर

किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि आगामी रबी सीजन में यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। खरीफ 2025 के दौरान आयात में बढ़ो...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Tue, 04 Nov 2025 06:16:24 AM (IST)Updated Date: Tue, 04 Nov 2025 06:30:33 AM (IST)
PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त से पहले किसानों के लिए खुशखबरी, अब मिलेगा इसका लाभ, पढ़ें पूरी खबर
किसानों के लिए लेकर खुशखबरी

HighLights

  1. किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है
  2. सरकार ने यूरिया को लेकर आश्वस्त किया

डिजिटल डेस्क। किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि आगामी रबी सीजन में यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। खरीफ 2025 के दौरान आयात में बढ़ोतरी और घरेलू उत्पादन में सुधार से देश में पर्याप्त भंडार तैयार हो चुका है। अक्टूबर तक 68.85 लाख टन यूरिया का बफर स्टॉक मौजूद है, जो पिछले महीने से 20 लाख टन अधिक है।

सरकार का कहना है कि समयबद्ध रणनीति, बढ़े हुए आयात और बेहतर वितरण प्रणाली के कारण किसानों को रबी के दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। खरीफ की अधिक मांग के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई गई थी और अब रबी के लिए भी पर्याप्त भंडारण किया गया है।


उत्पादन और आयात में बड़ा सुधार

घरेलू उत्पादन और आयात दोनों में सुधार से यूरिया आपूर्ति का ढांचा मजबूत हुआ है। इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत ने 58.62 लाख टन कृषि-ग्रेड यूरिया आयात किया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा 24.76 लाख टन थी। आयात में यह बढ़ोतरी खरीफ की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ रबी के लिए बफर स्टॉक तैयार करने में मददगार साबित हुई है।

अक्टूबर में घरेलू उत्पादन 26.88 लाख टन रहा, जो पिछले साल से 1.05 लाख टन अधिक है। अप्रैल से अक्टूबर के बीच औसतन हर महीने करीब 25 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ। नवंबर-दिसंबर के लिए 17.5 लाख टन का आयात पहले ही तय कर लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे रबी के दौरान आपूर्ति में कोई दबाव नहीं रहेगा।

राज्यों को सख्त निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि यूरिया वितरण में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाई जाए। डाइवर्जन, जमाखोरी, तस्करी और काले बाजार पर सख्त कार्रवाई की जाए। कई राज्यों ने सब्सिडी वाले यूरिया की ट्रैकिंग के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और तकनीकी उपकरणों का उपयोग शुरू किया है।

साथ ही, नमरूप और तलचर में दो नए यूरिया संयंत्रों का निर्माण चल रहा है, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 12.7 लाख टन होगी। इनके शुरू होने से आने वाले वर्षों में देश की आयात निर्भरता घटेगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम होगा।

खरीफ सीजन में बेहतर सप्लाई

उर्वरक विभाग के अनुसार, खरीफ सीजन में किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया गया था। खरीफ के लिए 185.39 लाख टन यूरिया की आवश्यकता थी, जबकि इसके विरुद्ध 230.53 लाख टन की आपूर्ति की गई। अच्छे मानसून और खेती के रकबे में वृद्धि के चलते बिक्री 193.20 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.08 लाख टन अधिक रही।

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