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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Amethi Lok Sabha Seat 2024: ‘मैदान छोड़कर नहीं भागने वालों का साथ देती है अमेठी’, क्या इस रिवाज का पालन करेंगे राहुल गांधी

Amethi Lok Sabha Seat 2024: संजय गांधी और स्मृति ईरानी ने हार के बाद अमेठी नहीं छोड़ा और जीत दर्ज की।

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sun, 24 Mar 2024 09:56:04 AM (IST)Updated Date: Sun, 24 Mar 2024 09:56:04 AM (IST)
Amethi Lok Sabha Seat 2024: ‘मैदान छोड़कर नहीं भागने वालों का साथ देती है अमेठी’, क्या इस रिवाज का पालन करेंगे राहुल गांधी
अमेठी जिले के साथ रायबरेली की सलोन तहसील व सुलतानपुर जिले की बल्दीराय तहसील के 29 राजस्व गांवों को मिलाकर अमेठी लोकसभा सीट बनी है।

HighLights

  1. एक समय कांग्रेस का गढ़ थी अमेठी लोकसभा सीट
  2. पहली बार संजय गांधी ने लड़ा था चुनाव
  3. 2019 में स्मृति ईरानी ने जीत दर्ज कर ढहा दिया किला

दिलीप सिंह, अमेठी (Amethi Lok Sabha Seat 2024)। लोकसभा चुनाव 2024 के सबसे बड़े सवालों में यह भी शामिल है कि क्या कांग्रेस राहुल गांधी को एक बार फिर टिकट देगी? क्या यूपी की इस हाई प्रोफाइल सीट पर एक बार फिर स्मृति ईरानी बनाम राहुल गांधी (Smriti Irani vs Rahul Gandhi) का मुकाबला देखने को मिलेगा?

Amethi Lok Sabha Seat 2024: हार के बाद मैदान नहीं छोड़ा, तो मिलेगी जीत

अमेठी लोकसभा का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां हार के बाद भी मैदान नहीं छोड़ने वाले प्रत्याशी के सिर जीत का सेहरा जरूर बंधता है।

संजय गांधी को अमेठी में पहली बार 1977 में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी संजय गांधी ने हार नहीं मानी और अमेठी में लगातार सक्रिय रहे। चार साल बाद हुए आम चुनाव 1980 में अमेठी ने संजय गांधी को भारी अंतर से जिता कर दिल्ली भेजा।


इसी तरह, 2014 में अमेठी आने वाली भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी अपना पहला चुनाव हारने के बाद अमेठी में बनी रहीं और पांच साल बाद 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर दिल्ली पहुंचीं।

अमेठी में कब कौन रहा सांसद

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गांधी-नेहरू परिवार से अमेठी का ऐसा जुड़ा था रिश्ता

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी 1976 में अमेठी आए थे। इस तरह अमेठी का नेहरू-गांधी परिवार से सीधा रिश्ता जुड़ा था। लंबे समय तक अमेठी में इस परिवार का डंका बजता रहा।

स्मृति ईरानी ने ऐसे रचा था इतिहास

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  • अमेठी में कांग्रेस के विजय रथ को रोकने के लिए भाजपा ने बहुत कोशिश की, पर चुनाव दर चुनाव उसके योद्धा परास्त होते जा रहे थे।
  • गांधी परिवार दोबारा अमेठी आने पर 1999 में दूसरे स्थान पर रहने वाली भाजपा आम चुनाव 2004 और 2009 में तीसरे पायदान पर पहुंच गई।
  • प्रतिकूल हालात में भाजपा ने आम चुनाव 2014 में स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के मुकाबले मैदान में उतारा।
  • मात्र 23 दिन में अमेठी में अपनी सक्रियता के बलबूते स्मृति ने 3,00,748 मत प्राप्त किए। मोदी सरकार में स्मृति को हार के बाद भी कैबिनेट मंत्री बनाकर बड़ा ओहदा दिया।
  • स्मृति एक सांसद की तरह हर माह व पखवाड़ा यहां आने लगीं। देखते ही देखते उन्हें दीदी के नाते एक नई पहचान मिलने लगी।
  • 2019 के चुनावों में स्मृति 55,120 मतों के अंतर से जीतकर संसद पहुंचीं। भाजपा को 4,68,514 मत मिले, जबकि कांग्रेस को 4,13,394 मत प्राप्त हुए।