• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • देश

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Sunday Holiday: आजादी से पहले अंग्रेज रविवार को जाते थे चर्च, भारतीय सातों दिन करते थे काम, फिर ऐसे हुई संडे छुट्टी की शुरुआत

भारत में संडे की छुट्टी की परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। इसके लिए मजदूरों के नेता नारायण मेघाजी लोखंडे को लंबा संघर्ष भी करना पड़ा था। इसके...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Sat, 13 Jul 2024 01:39:05 PM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jul 2024 08:14:12 AM (IST)
Sunday Holiday: आजादी से पहले अंग्रेज रविवार को जाते थे चर्च, भारतीय सातों दिन करते थे काम, फिर ऐसे हुई संडे छुट्टी की शुरुआत
ब्रिटिश काल से ही भारत में संडे को रहता है अवकाश

HighLights

  1. 10 जून 1890 को घोषित हुई रविवार की छुट्टी
  2. मजूदरों को सातों दिन करना पड़ता था काम
  3. नारायण मेघाजी लोखंडे ने 7 साल किया संघर्ष

Sunday Holiday डिजिटल डेस्क, इंदौर। सप्ताह के पूरे 6 दिन काम करने के बाद जहां कामकाजी लोगों को संडे का इंतजार रहता है, वहीं बच्चे भी इस दिन को लेकर उत्सुक रहते हैं। संडे ही ऐसा दिन है जब सभी स्कूल-कॉलेज और कार्यालय बंद रहते हैं। क्‍या आप जानते हैं, सप्ताह के सभी दिनों को छोड़कर सिर्फ रविवार को का दिन ही छुट्टी के लिए क्‍यों चुना गया, इसका कारण आपको यहां बताते हैं।

भारत में रविवार को छुट्टी की परंपरा ब्रिटिश काल से ही चली आ रही है। ये वो दौर था, जब भारत में छुट्टी को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। तब मिल में मजदूर सप्ताह के सभी 7 दिनों तक काम करते थे, जबकि अंग्रेज रविवार को चर्च जाया करते थे, लिहाजा यह दिन उनके आराम के लिए होता था।


naidunia_image

नारायण मेघाजी लोखंडे ने किया संघर्ष

इस समय नारायण मेघाजी लोखंडे आगे आए और साप्ताहिक अवकाश की मांग की। लोखंडे मिल मजदूरों के नेता था। उन्होंने अंग्रेजों से मांग की कि 6 दिन काम करने के बाद मजदूरों को एक दिन के लिए छुट्टी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने देश और समाज की सेवा कर सके। लोखंडे ने यह भी तर्क दिया कि रविवार का दिन हिंदू देवता 'खंडोबा' को समर्पित है, लिहाजा सभी मजदूरों को रविवार को छुट्टी मिलनी चाहिए।

लोखंडे की इस बात को अंग्रेजों ने सिरे से खारिज कर दिया और मजदूरों का 7 दिनों तक काम करना जारी रहा। इधर, लोखंडे ने भी अपना संघर्ष जारी रखा। 7 साल की लंबी लड़ाई के बाद ब्रिटिश सरकार को उनकी मांगों के आगे झुकना पड़ा और 10 जून 1890 को रविवार को छुट्टी का दिन घोषित कर दिया गया। इसके बाद से ही भारत में रविवार को छुट्टी देने की परंपरा चली आ रही है।

naidunia_image

कौन थे लोखंडे?

  • लोखंडे भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन के जनक के रूप में जाने जाते हैं, वे लोखंडे श्रम आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे।
  • जब महात्मा ज्योतिबा फुले ने कामगार संगठन ‘मुंबई मिल संगठन’ की शुरुआत की तो उसमें भी लोखंडे प्रमुख सहयोगी के तौर पर रहे।
  • भारत सरकार ने 2005 में लोखंडे के सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था