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किसानों के लिए बड़ी खबर... अब 'Digital Farmer ID' से ही मिलेगी खाद, सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट

Farmer ID News: केंद्र सरकार खाद की बिक्री को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एग्री स्टैक (Agri Stack) का सहारा लेने वाली है। इसके तहत, यूरिया की बिक्री क...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 23 Jan 2026 04:07:13 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Jan 2026 04:07:13 PM (IST)
किसानों के लिए बड़ी खबर... अब 'Digital Farmer ID' से ही मिलेगी खाद, सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट
अब 'Digital Farmer ID' से ही मिलेगी खाद। (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. अब सिर्फ असली किसानों को मिलेगी खाद
  2. यूरिया बिक्री को किसान आईडी से होगी लिंक
  3. कालाबाजारी रोकने के लिए बड़ा मास्टरस्ट्रोक

डिजिटल डेस्क। केंद्र सरकार खाद की बिक्री को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एग्री स्टैक (Agri Stack) का सहारा लेने वाली है। इसके तहत, यूरिया की बिक्री को धीरे-धीरे डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ा जाएगा। यह वही आईडी है जिसका उपयोग वर्तमान में पीएम-किसान योजना (PM Kisan Yojana) के पंजीकरण के लिए किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाली खाद केवल वास्तविक भू-स्वामियों या अधिकृत बटाईदारों तक ही पहुंचे।

यूरिया की रिकॉर्ड खपत और सब्सिडी का गणित

सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण फर्टिलाइजर सब्सिडी का बढ़ता हुआ खर्च है।

  • बजट अनुमान: सरकार ने चालू वित्त वर्ष (FY26) के लिए ₹1.68 ट्रिलियन की सब्सिडी का अनुमान लगाया था।
  • संशोधित अनुमान: यूरिया की रिकॉर्ड मांग के कारण यह खर्च ₹1.91 ट्रिलियन को पार कर सकता है।
  • खपत में वृद्धि: अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4% अधिक है।

सात जिलों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक कार्ययोजना तैयार की है। पहले चरण में देश के सात चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में किसानों की डिजिटल आईडी बन चुकी है। इस ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या आईडी के जरिए खाद बेचने से कालाबाजारी रुकती है और सब्सिडी का सही उपयोग होता है।


एग्री स्टैक और फार्मर आईडी

  • एग्री स्टैक एक डिजिटल फाउंडेशन है जो किसानों, डेटा और डिजिटल सेवाओं को एक मंच पर लाता है। इसका लक्ष्य डेटा के आधार पर किसानों को बेहतर निर्णय लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करना है।
  • 4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।
  • यह आईडी किसान की डेमोग्राफिक प्रोफाइल, जमीन की जानकारी और खेती के तरीकों को सुरक्षित रखती है।

किसान अपनी डिजिटल आईडी कैसे बनवाएं?

सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तेजी से आईडी बनाने पर काम कर रही है। किसान भाई इसे दो तरीकों से बनवा सकते हैं:

ऑनलाइन प्रक्रिया

  • राज्य के एग्री स्टैक पोर्टल या फार्मर रजिस्ट्री ऐप पर जाएं।
  • अपना आधार नंबर दें और eKYC की प्रक्रिया पूरी करें।
  • जमीन का सर्वे नंबर और खेत की अन्य डिटेल्स दर्ज करें।
  • डेटा उपयोग के लिए सहमति (Consent) दें और ई-साइन करें।
  • वेरिफिकेशन के बाद आपकी यूनिक डिजिटल आईडी जेनरेट हो जाएगी।

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ऑफलाइन प्रक्रिया

किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी अपनी आईडी बनवा सकते हैं।

इस कदम से किसे होगा फायदा?

अधिकारियों के अनुसार, इस एकीकरण से खाद की उस चोरी को रोका जा सकेगा जो अक्सर औद्योगिक इकाइयों की ओर डाइवर्ट कर दी जाती है। इससे केवल वही व्यक्ति खाद खरीद पाएगा जो वास्तव में खेती कर रहा है या जिसके पास जमीन का अधिकार है।