Weather Update Today: उत्तर भारत में 'कोल्ड टॉर्चर': 2°C तक लुढ़केगा पारा, दिल्ली-NCR समेत 5 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट
। उत्तर भारत में सर्दी ने एक बार फिर तीखा रुख अपना लिया है। 12 जनवरी को कई राज्यों में शीतलहर के तेज होने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभ ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 07:44:28 AM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 07:44:28 AM (IST)
उत्तर भारत में कोहरे का कहर डिजिटल डेस्क। उत्तर भारत में सर्दी ने एक बार फिर तीखा रुख अपना लिया है। 12 जनवरी को कई राज्यों में शीतलहर के तेज होने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ना तय है।
मौसम विभाग ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तर-पश्चिम भारत में चल रही बर्फीली हवाओं के कारण सुबह और रात के समय ठंड और ज्यादा चुभने वाली महसूस हो सकती है। कई जगहों पर शीतलहर के चलते लोगों को घरों में ही रहने की मजबूरी झेलनी पड़ सकती है।
दिल्ली का हाल
राष्ट्रीय राजधानी में ठंड का असर सबसे ज्यादा नजर आ सकता है। अनुमान है कि यहां न्यूनतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा। IMD के अनुसार, उत्तर से आ रही सर्द हवाएं पंजाब, राजस्थान होते हुए गुजरात के कच्छ तक अपना प्रभाव दिखा रही हैं, जिससे ठंड का दायरा बढ़ता जा रहा है।
यूपी-बिहार में कोहरे की मार
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में घने से बेहद घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। विजिबिलिटी घटने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। कुछ इलाकों में कोहरे के कारण बिजली आपूर्ति में भी रुकावट की आशंका जताई जा रही है।
दक्षिण भारत का मौसम
जहां उत्तर भारत ठिठुर रहा है, वहीं दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज अलग रहेगा। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहने की संभावना है, हालांकि यहां कड़ाके की ठंड जैसी स्थिति नहीं बनेगी।
आगे कैसा रहेगा मौसम का रुख?
मौसम पर नजर रखने वाली निजी एजेंसी Skymet Weather के मुताबिक आने वाले समय में वैश्विक मौसम पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौजूदा ला नीना की स्थिति 2026 की शुरुआत तक कमजोर पड़ सकती है। इसके बाद साल के अंत में अल नीनो के दोबारा सक्रिय होने की संभावना है, जिसका असर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के मानसून और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है।
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