
डिजिटल डेस्क। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारतीय खेल जगत को भी बड़ा झटका लगा है।
Pune, Maharashtra | Former Union Minister and Senior Congress leader Suresh Kalmadi passed away after a prolonged illness. He was admitted in Deenanath Mangeshkar hospital in Pune. His mortal remains will be kept at Kalmadi House, Erandwane, Pune till 2 pm and cremation will take…
— ANI (@ANI) January 6, 2026
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर दोपहर 2 बजे तक पुणे के एरंडवाने स्थित कलमाड़ी हाउस में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सुरेश कलमाड़ी का जन्म पुणे में हुआ था। उन्होंने 1960 के दशक में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रवेश लिया और बाद में भारतीय वायु सेना में बतौर पायलट सेवाएं दीं। वे 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। वायु सेना में छह साल की सेवा के बाद वे एनडीए में प्रशिक्षक भी रहे।
राजनीति में उनका प्रवेश संजय गांधी के माध्यम से हुआ। शुरुआत में उन्होंने महाराष्ट्र युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई और 1982 में पहली बार राज्यसभा सांसद बने। इसके बाद 1995-96 में नरसिम्हा राव सरकार में वे केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रहे और इसी दौरान उन्होंने रेल बजट भी प्रस्तुत किया।
राजनीति के साथ-साथ सुरेश कलमाड़ी की पहचान एक प्रभावशाली खेल प्रशासक के रूप में भी रही। वे 1996 में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष बने और लगातार कई वर्षों तक निर्विरोध चुने जाते रहे। इस दौरान भारतीय खेल प्रशासन में उनका खासा दबदबा रहा।
सुरेश कलमाड़ी का नाम कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले से भी जुड़ा रहा। इस मामले में उन पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे और सीबीआई ने उनके आवास पर छापेमारी भी की थी। हालांकि, बाद में पर्याप्त सबूत न मिलने पर अदालत ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।
शोक की लहर
सुरेश कलमाड़ी के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और खेल जगत से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया है। उनके जाने को महाराष्ट्र और भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।