GSAT- 20: इसरो और एलन मस्क पहली बार आएंगे साथ, अंतरिक्ष में रचेंगे इतिहास, जानिए इस मिशन के बारे में सबकुछ
GSAT- 20: इसरो फाल्कन-9 हेवी लिफ्ट लॉन्चर का उपयोग करेगी, जो खास रूप से भारत के लिए एक मिशन पर फ्लोरिडा से उड़ान भर सकता है। ...और पढ़ें
By Kushagra ValuskarEdited By: Kushagra Valuskar
Publish Date: Wed, 03 Jan 2024 06:49:42 PM (IST)Updated Date: Wed, 03 Jan 2024 06:49:42 PM (IST)
GSAT- 20डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट (Falcon-9 Rocket) का इस्तेमाल करके अपने जीसैट-20 भारी उपग्रह को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह एक एतिहासिक कदम है। यह पहली बार है कि इसरो फाल्कन-9 हेवी लिफ्ट लॉन्चर का उपयोग करेगी, जो खास रूप से भारत के लिए एक मिशन पर फ्लोरिडा से उड़ान भर सकता है। इस साल की दूसरी तिमाही में संभावित रूप से लॉन्च करने के लिए स्पेसएक्स (SpaceX) और इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड एक समझौते पर पहुंचे हैं।
स्पेसएक्स का फाल्कन-9 जीसैट-20 लॉन्च करेगा
यह समझौता इसरो की कमजोरी को दिखाता है। उसके पास अभी बड़े संचार उपग्रहों को ले जाने में सक्षम रॉकेट का अभाव है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ के अनुसार, भारत को स्पेसएक्स को चुनन पड़ा क्योंकि अन्य रॉकेट उपलब्ध नहीं था। स्पेसएक्स सौदा इस तथ्य पर प्रकाश डालता है कि भारत भारी उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए फ्रांसीसी एरियनस्पेस कंसोर्टियम पर निर्भर करता है। भारतीय रॉकेटों में चार टन से अधिक वजन वाले भारी उपग्रहों को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में प्रक्षेपित करने की क्षमता नहीं है।
जीसैट-20 मिशन क्या है?
जीसैट-20 उपग्रह (GSAT-20 Satellite) का वजन 4,700 किग्रा है। अपनी 32 बीम और उच्च थ्रूपुट क्षमता के साथ पूरे भारत में कवरेज प्रदान करता है। जिसमें जम्मू-कश्मीर, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं। उपग्रह जिसे जीएसएटी-एन2 नाम दिया गया है। देश के और भी दूरदराज के हिस्सों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए वनवेब और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। दूरसंचार कानून से सेवाएं आसान हो गई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। रिलायंस जियोस्पेस भी अंतरिक्ष-आधारित आईएसपी के लिए बाजार संभावनाएं तलाश रहा है।
इसरो की भविष्य की योजनाएं
भारत की सबसे बड़े रॉकेट की अधिकतम लिफ्ट क्षमता चार हजार किलोग्राम है। इसरो ने अगले सबसे भारी रॉकेट नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) की योजना बनाई है। जिसकी अधिकतम क्षमता दस हजार किलोग्राम होगी।