यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद आगे क्या, पढ़ें सभी सवालों के जवाब यहां
India Chandrayaan-3 Mission: मिशन लॉन्च के 41 दिन बाद चंद्रयान-3 चांद पर उतर गया। इस मून मिशन पर कितना खर्च हुआ है। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब आगे क्या ह...और पढ़ें
By Kushagra ValuskarEdited By: Kushagra Valuskar
Publish Date: Wed, 23 Aug 2023 10:18:33 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Aug 2023 10:49:26 PM (IST)
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद आगे क्या?HighLights
- भारत ने वो कर दिखाया जो अब तक अमेरिका, रूस और चीन नहीं कर पाए।
- भारत का झंडा अब विश्व में नहीं, बल्कि चांद पर भी लहराएगा।
- चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से में लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना भारत।
India Chandrayaan-3 Mission: भारत ने एक नया इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-3 मिशन सफल हो गया है। विक्रम लैंडर ने चंद्रयान-3 की चांद पर सफलतापूर्वक 23 अगस्त की शाम 06.04 बजे सॉफ्ट लैंडिंग करा दी है। चंद्रयान-2 मिशन असफल रहा था। चंद्रयान-2 की विफलता से सबक लेकर इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 मिशन को सफल बनाया है। इसरो ने एक बड़े बजट फिल्म की कीमत पर मिशन को पूरा किया है।
हम सभी इसरो और चंद्रयान मिशन की सफलता को देख रहे हैं। इसरो के वैज्ञानिक कई महीनों से इस मिशन पर काम कर रहे थे। मिशन लॉन्च के 41 दिन बाद चंद्रयान-3 चांद पर उतर गया। इस मून मिशन पर कितना खर्च हुआ है। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब आगे क्या होगा। इन सवालों के जवाब आपको इस खबर के जरिए मिलेंगे।
चंद्रयान-3 अभियान की घोषणा कब की गई थी?
इसरो ने बताया कि 6 जुलाई को चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च करेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने घोषणा की है चंद्रयान 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। श्रीहरिकोटा से दोपहर 2.35 बजे जीएसएलवी मार्क 3 (एलवीएम 3) हेवी-लिफ्ट लॉन्च वाहन द्वारा इसे लॉन्च किया गया।
चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद आगे क्या होगा?
विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सफलतापूर्वक उतर गया है। अब हजार्ड डिटेक्शन कैमरे एक्टिव हो जाएंगे। ये कैमरे लैंडिंग के बाद खतरों की जांच के लिए लगाए गए हैं। इन कैमरों से निरीक्षण के बाद जब सब कुछ ठीक होने का सिग्नल मिला। इसके बाद रोवर बाहर आया। अब रोवर चंद्रमा की यात्रा करेगा और विभिन्न प्रयोग करेगा।
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चंद्रयान-3 अभियान कितने समय तक चला?
- चंद्रयान-3 1 अगस्त, 2023 को चांद की कक्षा में पहुंचा। इसी दिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल करके लैंडिंग की तैयारी शुरू हुई।
- 5 अगस्त, 2023 को चंद्रयान को चंद्रयान-3 चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया।
- चंद्रयान ने 6 अगस्त से 16 अगस्त 2023 तक 10 दिनों में चांद की सतह तक यात्रा की।
- 17 अगस्त, 2023 को लैंडर अंतरिक्ष यान से अलग हो गया। लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू हुई।
- अंतरिक्ष यान 41 दिन की यात्रा के बाद 23 अगस्त 2023 पर सफलतापूर्वक उतर गया।
चंद्रयान-3 मिशन की लागत कितनी थी?
इस मून मिशन के लिए इसरो ने 615 करोड़ रुपए का बजट रखा है। वहीं रूस के लूना 25 मून मिशन का बजट करीब 1,600 करोड़ रुपए था।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर क्यों हुई चंद्रयान-3 की लैंडिंग?
भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर झंडा फहराने वाला पहला देश है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यान का उतरना सबसे कठिन है। यहां का तापमान माइनस 230 डिग्री सेल्सियस है। दावा किया जाता है कि यहां पानी और खनिज मौजूद हैं। इस कारण इसरो ने यहां पर अपना अंतरिक्ष यान उतारा है।
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कोई भी अंतरिक्ष यान दक्षिणी ध्रुव के पास क्यों नहीं उतरा?
- अब तक अधिकांश यान चांद के भूमध्यरेखीय हिस्से पर उतरे हैं। चीन का Chang'e 4 भूमध्य रेखा के पार उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान था। यहां का भूभाग और तापमान सहनीय है। साथ ही सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में है।
- इसके विपरीत, चांद का ध्रुवीय क्षेत्र अधिक कठिन है। यहां की सतह समतल नहीं है। यहां के कई हिस्से पूरी तरह से अंधेरे में हैं। दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव से अधिक गहरा है।
- इस जगह का तापमान माइनस 230 डिग्री सेल्सियस से कम है। सूरज की रोशनी की कमी है। बेहद कम तापमान के कारण उपकरण चलाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, दक्षिणी ध्रुव पर विभिन्न आकार के क्रेटर हैं।
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अब अगला लक्ष्य क्या है?
ऐसा माना जाता है कि दक्षिणी ध्रुव पर गड्ढों में बर्फ के रूप में पानी है। इसके अलावा, अत्यधिक ठंडे तापमान के कारण अपरिवर्तित रूप में जमी हुई अवस्था में पाई जा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर गड्ढों में जीवाश्म पाए जाते हैं तो उनके अध्ययन से सौर मंडल के निर्माण की घटनाओं पर प्रकाश डाला जा सकता है। बता दें 2008 में चंद्रयान-1 मिशन में चांद की सतह पर पानी के प्रमाण मिले थे।