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Indian Railway News: भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, ट्रेन के डिब्बों में यात्रियों को मिलेगी संक्रमण-मुक्त हवा

Indian Railway News: भारतीय रेलवे यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों में वायरलेस रोबोटिक अल्ट्रावायलेट यूवी-सी कीटाणुशोध...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 18 Nov 2025 05:23:58 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Nov 2025 05:35:09 PM (IST)
Indian Railway News: भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, ट्रेन के डिब्बों में यात्रियों को मिलेगी संक्रमण-मुक्त हवा
Indian Railway: ट्रेन के कोच के अंदर लगा वायरलेस रोबोटिक कीटाणुशोधन।

HighLights

  1. ट्रेन कोचों में यूवी-सी तकनीक लागू होगी।
  2. 99.99% जीवाणु कमी दर्ज की गई।
  3. दिल्ली मंडल में सफल 90 दिन ट्रायल।

डिजिटल डेस्क: भारतीय रेलवे यात्रियों को संक्रमण-मुक्त और सुरक्षित यात्रा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी पहल करने जा रहा है। अब ट्रेन के कोचों की हवा पहले से कहीं अधिक स्वच्छ और रोगाणुरहित होगी। इसके लिए रेलवे वायरलेस रोबोटिक अल्ट्रावायलेट यूवी-सी कीटाणुशोधन तकनीक का उपयोग शुरू करने वाला है। इस तकनीक की मदद से ट्रेन के डिब्बों में मौजूद हानिकारक जीवाणु और वायरस निष्क्रिय हो जाएंगे, जिससे यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर हो सकेगी।

दिल्ली रेल मंडल की कई प्रमुख ट्रेनों में इस तकनीक का 90 दिनों तक सफल परीक्षण किया गया। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित कंपनी मेसर्स ग्रीनस्काइज एविएशन प्रा. लि. ने यह ट्रायल किया, जिसमें जीवाणु भार में 99.99% तक कमी दर्ज हुई। परीक्षण के उत्कृष्ट परिणामों को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को यह तकनीक अपनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।


यह उन्नत रोबोटिक प्रणाली एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें मोबाइल रोबोट और यूवी-सी कीटाणुशोधन बैटन शामिल है। इसमें अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाए गए हैं, जो परिस्थिति के अनुसार स्वतः काम करते हैं। यूवी-सी किरणें 254 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य पर बैक्टीरिया और वायरस के डीएनए-आरएनए को निष्क्रिय कर देती हैं, जिससे वे जीवित नहीं रह पाते। यह प्रक्रिया पूरी तरह रसायन-मुक्त और पर्यावरण अनुकूल है, जो किसी भी प्रकार के हानिकारक अवशेष नहीं छोड़ती।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक सतहों और हवा दोनों को सुरक्षित बनाने में प्रभावी है। एनआरसी-सीएमएफआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. डीबी सिंह के अनुसार, अल्ट्रावायलेट तकनीक पानी से लेकर हवा तक में मौजूद सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है। इससे ट्रेन के वातानुकूलन, वेंटिलेशन और तापमान नियंत्रण के साथ एकीकृत होकर हवा को लगातार साफ रखा जा सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा काफी कम होगा।

रेलवे बोर्ड के पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग मैनेजमेंट निदेशक अजय झा ने क्षेत्रीय रेलों को आरडीएसओ के साथ समन्वय कर एक वर्ष के लिए इस तकनीक के ट्रायल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उत्तर रेलवे से तकनीकी सहायता लेने को भी कहा गया है।

ग्रीनस्काइज एविएशन के डायरेक्टर ऑपरेशंस कैप्टन पवन कुमार अरोड़ा के अनुसार, वायरलेस रोबोटिक यूवी-सी सिस्टम आईसीएमआर-सीएसआईओ प्रमाणित है और पूर्णतः हरित, टिकाऊ तथा रसायन-मुक्त समाधान प्रदान करता है, जो वैश्विक पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है।

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