
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के सबसे ईमानदार नेता का जब भी बात होगा तो सबसे पहले लाल बहादुर शास्त्री का नाम आता हैं। लाल बहादुर शास्त्री का आज जन्मदिन है और इस मौके पर हम आपको उनके कुछ राज से पर्दा उठाएंगे।
लाल बहादुर शास्त्री जब पीएम बने थे तब ना उनके पास अपना घर था ना कोई कार। बताया जाता है कि जब शास्त्री जी के घर वाले ने उनसे कार खरीदने के लिए बोला और वो पता करने गए दाम तो कार की कीमत 12000 बताई गई जबकि उनके खाते में सिर्फ 7000 रुपए थे ऐसे में उन्हें 5000 रुपए का लोन लेना पड़ा।
कार लेने के कुछ समय तााशकंद की घटना हो गई जिसमें शास्त्रीजी का निधन हो गया। इसके बाद पीएम इंदिरा गांधी ने उनके लोन को माफ करने की पेशकश की थी लेकिन शास्त्रीजी की पत्नी ललिता शास्त्री ने उनकी बात को सहजता से नकारते हुए कहा कि किस्तें वो भरेंगी। शास्त्री जी की मौत के चार साल बाद तक ललिता कार की ईएमआई चुकाती रहीं। ये कार आज भी दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल में रखी हैं।
लाल बहादुर शास्त्री के बैंक खाते में नहीं थी कोई बड़ी जमापूंजी
रिपोर्टस के अनुसार, देश के प्रधानमंत्री रहते हुए भी शास्त्री जी के पास ना कोई बड़ी गाड़ी थी ना कोई आलीशान मकान। उनके बैंक खाते में भी कोई बड़ी जमापूंजी नहीं थी।
साल 1965 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। उस समय देश में अनाज का भारी संकट पैदा हो गया था। उस समय भारत अनाज के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर था।
युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए अनाज की आपूर्ति रोकने की धमकी दी। शास्त्री जी ने भी ठान लिया कि वे किसी भी कीमत पर देश का सिर झुकने नहीं देंगे।
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शास्त्री जी ने अपनी पत्नी ललिता शास्त्री से कहा कि आज शाम हमारे घर में खाना नहीं बनेगा। वे देखना चाहते थे कि क्या उनके बच्चे बिना भोजन के भूखे रह सकते हैं। जब उन्हें विश्वास हो गया कि उनका परिवार देश के लिए ये त्याग कर सकता है, तब उन्होंने देशवासियों से ऑल इंडिया रेडियो पर एक भावुक अपील करते हुए जनता से कहा, "हफ्ते में एक दिन, एक वक्त का खाना न खाएं, ताकि उस अनाज को संकट के समय में बचाया जा सके।"