14 साल बाद महंगी हुई माचिस, जानें क्यों और कितनी बढ़ी कीमत
matchbox expensive माचिस उद्योग पूरी तरह से दक्षिण भारत में फैला है। विशेषकर तमिलनाडु में माचिस उद्योग विकसित है। ...और पढ़ें
By Sandeep ChoureyEdited By: Sandeep Chourey
Publish Date: Wed, 01 Dec 2021 09:14:37 AM (IST)Updated Date: Wed, 01 Dec 2021 12:13:54 PM (IST)

Matchbox Update Price । कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण दिसंबर से एक माचिस की कीमत दोगुनी हो गई है। दिसंबर से माचिस की एक डिब्बी 2 रुपए में बिकेगी। शिवकाशी में ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैच बॉक्स ने बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति के कारण माचिस की कीमत में 14 बाद कीमत बढ़ाने का फैसला किया है।
2007 में बढ़ी थी कीमत
इससे पहले माचिस की कीमत 2007 में 50 पैसे से बढ़ाकर 1 रुपए की गई थी। वहीं 1995 में माचिस की कीमत 25 पैसे से बढ़ाकर 50 पैसे कर दी गई थी। माचिस निर्माताओं का कहना है कि माचिस की डिब्बी बनाने में इस्तेमाल होने वाली 14 वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। माचिस निर्माताओं ने बताया कि 1 किलोग्राम लाल फास्फोरस की कीमत 425 रुपए से बढ़कर 810 रुपए हो चुकी है। वहीं मोम की कीमत भी 58 रुपए से बढ़कर 80 रुपए हो गई है। इसके अलावा माचिस के निर्माण में उपयोग आने वाले अन्य प्रोडक्ट जैसे कागज, स्प्लिंट्स, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर की बढ़ती कीमतों के कारण भी माचिस की कीमत बढ़ाई गई है।
माचिस का उत्पादन तमिलनाडु में ज्यादा
गौरतलब है कि माचिस उद्योग पूरी तरह से दक्षिण भारत में फैला है। विशेषकर तमिलनाडु में माचिस उद्योग विकसित है। तमिलनाडु अकेला प्रांत है, जहां पूरे माचिस उद्योग का 90 फीसदी उत्पादन किया जाता है। माचिस फैक्ट्रियों में पुरुष और महिलाएं काम करती हैं और उनका रोजगार इसी धंधे से चलता है। माचिस बनाने के काम में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा है।
माचिस के निर्यात में भी आई गिरावट
माचिस उद्योग में भी बीते कुछ सालों से गिरावट आ रही है। 2015 में माचिस उद्योग ने 25 फीसदी की भारी गिरावट का सामना किया, जिसके कारण 8,000 से अधिक माचिस प्लांट बंद हो गए थे। भारत फिलहाल 240 करोड़ रुपए की माचिस की तीलियों का निर्यात करता है, लेकिन यह लगातार घट रहा है।