उत्तर भारत में उल्लू पर अलर्ट
वन महकमों से कहा गया है कि वे जंगलों के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगाह रखें ताकि इसका शिकार न होने पाए। ...और पढ़ें
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Publish Date: Wed, 19 Oct 2016 07:48:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Oct 2016 07:51:24 PM (IST)

देहरादून। दीपावली के नजदीक आते ही उल्लुओं पर खतरा मंडराने लगा है। तंत्र-मंत्र के मद्देनजर होने वाले इसके शिकार को देखते हुए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने उत्तराखंड समेत उत्तर भारत में अलर्ट जारी कर दिया है। सभी राज्यों के वन महकमों से कहा गया है कि वे जंगलों के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगाह रखें ताकि इसका शिकार न होने पाए।
उन जगहों पर भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, जहां परिदों का व्यापार होता है। दुनियाभर में उल्लुओं की लगभग 216 प्रजातियां हैं और इनमें से 32 भारत में मिलती हैं। उत्तराखंड में उल्लू की लगभग 19 प्रजातियां पाई जाती हैं। डब्ल्यूसीसीबी के उपनिदेशक उत्तर क्षेत्र निशांत वर्मा के मुताबिक हर साल ही दीपावली पर इसके शिकार की आशंका बढ़ जाती है।
इसे देखते हुए उत्तर भारत के सभी राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में तंत्र-मंत्र के लिए उल्लुओं का शिकार होता है। इस लिहाज से उत्तराखंड में देहरादून, हल्द्वानी, रामनगर, काशीपुर, कोटद्वार, हरिद्वार समेत कुछ अन्य इलाके बेहद संवेदनशील हैं।
उत्तराखंड में वन विभाग को कहा गया है कि अभी से इस मामले में विशेष सतर्कता बरती जाए। यही नहीं कुछेक मौके पर बात सामने आई कि मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ समेत अन्य क्षेत्रों से उल्लू की तस्करी उत्तराखंड में की जाती है। लिहाजा राज्य की सीमाओं पर भी चौकसी की जरूरत है।
इसलिए है लक्ष्मी के वाहन पर संकट हिंदू मान्यता के अनुसार उल्लू धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है। देश में यही मान्यता इस पक्षी की दुश्मन बन गई है। नतीजतन दीपावली से ठीक पहले उल्लू की तस्करी काफी बढ़ जाती है। हर साल विभिन्न हिस्सों में दीपावली की पूर्व संध्या पर उल्लू की बलि के मामले सामने आते रहे हैं।