पारसी पंचायत ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार, परंपरागत तरीके से अंतिम संस्कार करने दे सरकार
पारसी समुदाय ने कोरोना से मरनेवाले अपने लोगों को जलाये जाने या दफनाये जाने के खिलाफ कोर्ट में अपील दायर की है। ...और पढ़ें
By Shailendra KumarEdited By: Shailendra Kumar
Publish Date: Fri, 21 May 2021 11:24:31 PM (IST)Updated Date: Fri, 21 May 2021 11:30:16 PM (IST)

अहमदाबाद। पारसी समुदाय के लोगों ने कोरोना संक्रमण के कारण मारे गये उनके समाज के लोगों के दफन या अग्निदाह के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में अपील की है। पारसी पंचायत का कहना है कि उनके समाज के लोगों का पारंपरिक विधि से ही अंतिम संस्कार करने दिया जाए।पारसी पंचायत की ओर से अधिवक्ता मनन भट्रट ने याचिका दाखिल करते हुए अदालत को बताया कि किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार उसके समाज की पारंपरिक विधि से हो यह उसका अधिकार है। लेकिन प्रशासन की ओर से बिना किसी अधिसूचना, परिपत्र के इससे रोका जा रहा है।
पारसी पंचायत की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोरोना से मरनेवाले उनके समाज के लोगों के शव का अग्निदाह अथवा दफन के लिए का दबाव डाला जा रहा है। वकील भट्ट ने बताया कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19,21, 25, 26 व 29 का हनन है। समाज की मांग है कि उन्हें टावर ऑफ साइलेंस में मृत देह को रखकर दोखमे नशीन की परंपरा से ही अंतिम विधि करने दिया जाए। भारत में अल्पसंख्यक पारसी समुदाय की रिवाजों के मुताबिक, व्यक्ति की मौत के बाद उनके शरीर को गिद्धों के लिए टॉवर ऑफ साइलेंस या एक गहरे गड्ढे में छोड़ दिया जाता है। टॉवर ऑफ साइलेंस एक खुली जगह होती है, जहां मृत शरीर को छोड़ा जाता है।
पारसी पंचायत की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक तथ्य सामने नहीं आया है जिसमें मृत देह से संक्रमण की पुष्टि की गई हो। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 27 मई को जवाब पेश करने को कहा है। वैसे कई इलाकों में हालात की गंभीरता को देखते हुए पारसी पंचायत पदाधिकारियों ने कोरोना के चलते जान गंवाने वाले लोगों को अग्निदाह करने की मंजूरी दे दी है। इसकी वजह ये है कि पारसी समाज के लोग अग्नि को अति पवित्र मानते हैं।