पंजाब एसएसएफ ने फूंकी जानः जब समय पर पहुंची मदद, तब बची सांसें
इस फोर्स की खास ताकत हैं इसकी महिला कर्मी। 28 प्रतिशत महिला बल न सिर्फ दुर्घटनाओं में मदद कर रहा है, बल्कि महिलाओं, बच्चों और रात में यात्रा करने वालो ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Jan 2026 07:01:37 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Jan 2026 07:06:35 PM (IST)
पंजाब सड़क सुरक्षा फोर्स।HighLights
- एसएसएफ सिर्फ कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदना की पुलिसिंग है।
- स्पीड गन, बॉडी कैमरा और एआई तकनीकव्यवस्था मजबूत बनाते हैं।
- वहीं राहत कार्यों में उतरना इसके सामाजिक दायित्व को भी दर्शाता है।
रात का समय, तेज रफ्तार और अचानक हुआ हादसा... अक्सर ऐसे दृश्य जिंदगी छीन लेते हैं, लेकिन पंजाब में अब तस्वीर बदली है। सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) उन हजारों लोगों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आई है, जिनकी सांसें समय पर मिली मदद से बच सकीं। जनवरी 2024 से अब तक 60,000 से ज्यादा जिंदगियां इसकी गवाह हैं।
पंजाब की सड़कों पर हर 30 किलोमीटर पर मौजूद एसएसएफ टीमें हादसे के बाद पीड़ित को अकेला नहीं छोड़तीं। 5–7 मिनट में मौके पर पहुंचकर प्राथमिक इलाज और अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना अब उनकी पहचान बन चुकी है। कई परिवार आज इसलिए जुड़े हैं, क्योंकि किसी ने समय रहते दरवाजा खटखटाया।
इस फोर्स की खास ताकत हैं इसकी महिला कर्मी। 28 प्रतिशत महिला बल न सिर्फ दुर्घटनाओं में मदद कर रहा है, बल्कि महिलाओं, बच्चों और रात में यात्रा करने वालों को सुरक्षा का भरोसा भी दे रहा है। अब तक 15 लोगों को आत्महत्या के विचार से लौटाया जाना इस मानवीय चेहरे का प्रमाण है।
एसएसएफ सिर्फ कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदना की पुलिसिंग है। स्पीड गन, बॉडी कैमरा और एआई तकनीक जहां व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं, वहीं राहत कार्यों में उतरना इसके सामाजिक दायित्व को दर्शाता है।
ग्रामीण सड़कों के उन्नयन, जेबरा क्रॉसिंग और साइन बोर्ड जैसी योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हादसे हों ही न। एसएसएफ ने साबित किया है कि जब सरकार की मंशा सही हो, तो सड़कें भी सुरक्षित बन सकती हैं।