Privatisation of Railway: ट्रेनों को निजी हाथों की ओर बढ़ा रेलवे, जानिए क्या रहेगा सिस्टम
रेलवे बोर्ड ने छह जोनों के आला अफसरों से निजी ट्रेन संचालन पर चर्चा की है। निजी कंपनियों को होगा किराया तय करने का अधिकार ...और पढ़ें
By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Fri, 27 Sep 2019 11:57:59 PM (IST)Updated Date: Fri, 27 Sep 2019 11:59:28 PM (IST)

नई दिल्ली। रेलवे ने ट्रेनों का संचालन निजी हाथों में देने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। शुक्रवार को इस संबंध में अलावा अफसरों की बैठक हुई, जिसमें इसके नफा-नुकसान के साथ ही 28 रूटों के चयन एवं टेंडर प्रक्रिया पर मंथन हुआ। बैठक में रेलवे के बड़े अधिकारियों के साथ 6 जोन के अफसर मौजूद रहे। पढ़िए खास बातें -
जानिए क्या हुआ बैठक में
यह बैठक रेलवे बोर्ड के सदस्य, यातायात पूर्णेंदु शेखर मिश्रा ने बुलाई थी और उत्तर, मध्य, पूर्व-मध्य, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-मध्य और दक्षिण रेलवे के प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधकों ने हिस्सा लिया था। बैठक में लंबी दूरी और इंटरसिटी वाले 24 रूटों समेत करीब 56 ओरिजिनेटिंग टर्मिनलों का जिक्र हुआ। इसके बाद जोनल अफसरों से अपनी जरूरत और सहूलियत के अनुसार रूटों में फेरबदल करने तथा फाइनल सूची तैयार करने की सलाह दी।
इसलिए जरूरी है निजी क्षेत्र की मदद
अधिकारियों के मुताबिक, 2021-22 में पूर्वी और पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों का संचालन शुरू हो जाएगा। तब मौजूदा रूट यात्री ट्रेनों के लिए काफी हद तक खाली हो जाएंगे। ऐसे में यात्री ट्रेनों की संख्या, रफ्तार, सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने के की आवश्यक होगी। इसमें निजी क्षेत्र मददगार साबित हो सकता है।
यह हो सकती है व्यवस्ता
- प्राइवेट ट्रेनों के संचालन में जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रचालन व सुरक्षा स्टाफ (लोको पायलट, गार्ड तथा आरपीएफ गार्ड) रेलवे के होंगे, वहीं निजी कंपनियों को किराया तय करने, टिकट वितरण तथा ट्रेन के भीतर अपने हिसाब से सुविधाएं व सेवाएं प्रदान करने तथा स्टाफ रखने की छूट होगी।
निजी क्षेत्र को ट्रेन के भीतर मनोरंजन प्रदान करने और विज्ञापन करने का अधिकार भी मिलेगा। बदले में रेलवे उनसे हॉलेज शुल्क के रूप में निश्चित रकम वसूलेगा।
निजी ट्रेनों के संचालन से पहले चयनित रूटों को दुरुस्त करने तथा टर्मिनलों को विकसित व विस्तारित करने के निर्देश भी रेलवे बोर्ड ने जोनल अफसरों को दिए हैं।
टेंडर प्रक्रिया के बारे में ये बात स्पष्ट कर दी गई कि ये पूरी तरह पारदर्शी होगी तथा रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) तथा रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) में देश-विदेश की सभी कंपनियों को समान मौका दिया जाएगा।