तेंदुए के शिकार का मामलाः MP हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 'वाइल्डलाइफ SOS' के CEO की याचिका पर सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट तेंदुए के कथित शिकार के मामले में 'वाइल्डलाइफ SOS' के सह-संस्थापक और CEO को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस लेने के मामले की सुनवा...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 05:49:08 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 05:49:08 PM (IST)
HighLights
- मामला एसटीएसएफ द्वारा तेंदुओं के कथित शिकार की जांच से जुड़ा है
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी
- उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद की गई तेंदुओं की खाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत तेंदुए के कथित शिकार के मामले में 'वाइल्डलाइफ SOS' के सह-संस्थापक और CEO कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी।
सत्यनारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस बागची और वी. मोहना की बेंच से याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। सीजेआई ने कहा, इसे लिस्ट किया जाएगा। यह मामला मध्य प्रदेश राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) द्वारा तेंदुओं के कथित शिकार की जांच से जुड़ा है, जिनकी खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद की गई थीं।
गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सत्यनारायण की गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने उन्हें 21 सितंबर को STSF के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया था।
फरार बताए जाने के दावे को खारिज किया
'वाइल्डलाइफ SOS' प्रमुख ने राज्य द्वारा उन्हें फरार बताए जाने के दावे को खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि उसकी अवैध शिकार-रोधी इकाई ने कथित रैकेट का पर्दाफाश करने में अधिकारियों की मदद की थी और कानूनी सुरक्षा मांगने का मतलब जांच में सहयोग करने से इनकार करना नहीं है।
हमने तेंदुए की खालें बरामद करवाई थीं
दवे ने मंगलवार को बेंच को बताया कि सत्यनारायण के संगठन ने अधिकारियों को तेंदुए की खालें बरामद करने में मदद की थी, लेकिन बाद में उन्हें ही मामले में फंसा दिया गया। दवे ने कहा, हाई कोर्ट ने वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हम एक NGO से हैं और हमने तेंदुए की खालें बरामद करवाई थीं। अब राज्य ने हमें ही मामले में फंसा दिया है।