सुप्रीम कोर्ट जांच करेगा कि क्या चुनाव आयोग का एफिडेविट SIR के फैसलों में एकमत साबित करता है: पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार
पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह जांचना होगा कि क्या एफिडेविट यह साबित करने के लिए काफी है कि चुनाव आयोग के फैसले एकमत से लिए गए थे।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 02:18:41 PM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 02:18:41 PM (IST)
HighLights
- मुख्य मुद्दा यह है कि फैसले चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने एकतरफा लिए थे
- दो इलेक्शन कमिश्नरों की आपत्तियां वापस ली गईं या माफ कर दी गईं
- फॉर्म के साथ एक और डिक्लेरेशन मांगना अमेंडमेंट माना जाएगा या नहीं
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल रोल के एसआईआर (SIR) पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के एफिडेविट के बाद पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह जांचना होगा कि क्या एफिडेविट यह साबित करने के लिए काफी है कि उसके फैसले एकमत से लिए गए थे।
अश्विनी कुमार ने कहा, यह एफिडेविट फाइल किया गया है और सुप्रीम कोर्ट को अब यह तय करना होगा कि उस एफिडेविट का क्या असर है। आंदोलन का मुख्य मुद्दा और लोगों के मन में शक यह है कि फैसले चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने एकतरफा लिए थे।
इस एफिडेविट के साथ कोर्ट को यह देखना होगा कि क्या एफिडेविट का कंटेंट यह साबित करने के लिए काफी है कि फैसले एकमत से लिए गए थे।
दो इलेक्शन कमिश्नरों की आपत्तियां वापस ली गईं या माफ कर दी गईं
पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि कोर्ट को यह भी जांचना होगा कि क्या दो इलेक्शन कमिश्नरों द्वारा उठाई गई शुरुआती आपत्तियां वापस ली गईं या माफ कर दी गईं। भले ही आखिरी फैसले एकमत से लिए गए हों। हालांकि, अभी भी एक बड़ा सवाल यह है कि अगर फैसले आखिर में एकमत से लिए भी गए, तो क्या दोनों इलेक्शन कमिश्नरों की शुरुआती आपत्तियां माफ कर दी गईं या वापस ले ली गईं। यह कुछ ऐसा है जिस पर कोर्ट को गौर करना होगा।
फॉर्म के साथ एक और डिक्लेरेशन मांगना अमेंडमेंट माना जाएगा या नहीं
फॉर्म 6 के मुद्दे पर पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि कोर्ट को यह तय करना होगा कि फॉर्म के साथ एक और डिक्लेरेशन मांगना अमेंडमेंट माना जाएगा या नहीं। इसी तरह, जहां तक फॉर्म 6 की बात है, इलेक्शन कमीशन ने अपने एफिडेविट में कहा है कि इसमें अमेंडमेंट नहीं किया गया था।
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि फॉर्म 6 के साथ एक और डिक्लेरेशन के जरिए एक्स्ट्रा जानकारी मांगी गई थी। क्या वह जरूरत अमेंडमेंट बनती है या नहीं, यह भी एक ऐसा मामला है जिस पर सुप्रीम कोर्ट को गौर करना होगा।
सर्वसम्मति से लिए गए फैसले थेः चुनाव आयोग
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया कि 2025 और 2026 में जारी किए गए सभी तीन स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) आदेश आयोग की सामूहिक सहमति से लिए गए "सर्वसम्मति से लिए गए फैसले" थे।
चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) के एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज और फैसले लेने को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जवाबी हलफनामे में चुनाव निगरानी संस्था ने कहा कि निर्देश एकतरफा नहीं थे।
आयोग ने खास तौर पर कहा कि तीन SIR आदेश जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए। संवैधानिक संस्था के सभी सदस्यों की आम सहमति से लिए गए थे। फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।