अनशन से समझौते तक: सोनम वांगचुक ने छात्रों के हित में लिया बड़ा फैसला, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का क्या हुआ?
26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के लिखित आश्वासन पर अपना अनशन खत्म किया। छात्रों के हित, नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार पर संसद में चर्चा का भरो...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 01:11:20 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 01:12:51 PM (IST)
HighLights
- 65 सांसदों ने हस्ताक्षर कर यह भरोसा दिया
- मांगों और शर्तों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई
- लिखित आश्वासन को स्वीकार करना उचित समझा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 26 दिनों से छात्रों के मुद्दों और नीट पेपर लीक (NEET paper leak) मामले को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
सरकार ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर संसद में चर्चा कराने और प्रभावित परिवारों के प्रति सकारात्मक पहल का भरोसा दिया है।
65 सांसदों ने हस्ताक्षर कर यह भरोसा दिया
अनशन समाप्त करने के बाद वांगचुक ने कहा कि इस आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिला। उनके अनुसार करीब 65 सांसद उनसे मिलने पहुंचे और हस्ताक्षर कर यह भरोसा दिया कि वे संसद में नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
मांगों और शर्तों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई
उन्होंने बताया कि सरकार के साथ पिछले दो दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी। दोनों पक्षों के बीच मांगों और शर्तों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। वांगचुक ने कहा कि वे केवल मौखिक भरोसे से संतुष्ट नहीं थे और लिखित आश्वासन चाहते थे। इसी प्रक्रिया में दो दिन अतिरिक्त लग गए, जिसके कारण उन्हें अपना अनशन भी दो दिन और जारी रखना पड़ा।
सरकार के लिखित आश्वासन को स्वीकार करना उचित समझा
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि जरूरत पड़ती तो वह और लंबे समय तक अनशन जारी रख सकते थे, लेकिन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन को स्वीकार करना उचित समझा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फिलहाल कोई समय-सीमा या स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया।
ऐसे में उनके सामने विकल्प था कि या तो अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रखें या छात्रों के हितों और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
इन प्रमुख मांगों पर बनी सहमति
- सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन के अनुसार जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों, युवाओं और 'संसद चलो' मार्च में शामिल प्रतिभागियों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई, जैसे एफआईआर, नहीं की जाएगी।
- इसके अलावा पेपर लीक और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के संबंध में सरकार सकारात्मक पहल करेगी।
- साथ ही संसद में देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर व्यापक चर्चा कराने पर भी सहमति बनी है। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सरकार अपने लिखित आश्वासन पर गंभीरता से अमल करेगी और छात्रों से जुड़े सुधारात्मक कदम जल्द सामने आएंगे।
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