
डिजिटल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर धांधली और वोट काटे जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और INDI गठबंधन के अन्य शीर्ष नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इसके साथ ही अदालत ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट परिसर में राहुल गांधी द्वारा निकाले गए मार्च और वहां उपजे हंगामे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नेताओं से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए रजिस्ट्री परिसर में हुई अव्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय को किसी राजनीतिक प्रदर्शन का केंद्र बनाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने बताया कि करीब 200 वकीलों ने हस्ताक्षर कर विरोध दर्ज कराया है कि इस प्रकार का आचरण अदालत को डराने-धमकाने की कोशिश जैसा है।
इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता।" पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं में से एक (राहुल गांधी) से उनके इस आचरण और परिसर में मचे बवाल को लेकर सवाल पूछे जाएंगे और उन्हें इस पर अपनी स्थिति साफ करनी होगी।
उल्लेखनीय है कि बीते 12 अक्टूबर (सोमवार) को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता विरोध दर्ज कराने के लिए भारी हुजूम के साथ सुप्रीम कोर्ट की तरफ बढ़े थे। नेताओं की योजना खुद याचिका दायर करने की थी, लेकिन रजिस्ट्री बंद होने के समय से ठीक पहले वकीलों के जरिए याचिका जमा करवाई गई। इसके बावजूद, नेताओं और उनके समर्थकों के बड़े समूह के रजिस्ट्री तक पहुँचने की वजह से सुप्रीम कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी।
अदालत में फिलहाल राहुल गांधी का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल रख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी, जबकि अदालत परिसर में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध से जुड़ी याचिकाओं पर अलग से विचार होगा।
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