डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/चंडीगढ़। केंद्रीय रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके साथ ही केंद्र सरकार में उनका मंत्री पद समाप्त हो गया है।
पद छोड़ने के बाद बिट्टू ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक समर्पित सिपाही हैं और संगठन का हर निर्देश उनके लिए सर्वोपरि है।
इस्तीफे को राजनीतिक जानकार दो तरह से देख रहे
हालांकि, रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे को राजनीतिक जानकार दो तरह से देख रहे हैं। एक पंजाब में कमजोर होती भाजपा को चुनाव से पहले मजबूत करने की दिशा में अभी से बढ़ाया गया कदम। क्योंकि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद पंजाब के किसानों में देखी जा रही नाराजगी ने भी भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दूसरा यह कि नीट पेपर लीक के बाद छात्रों और विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा ध्यान भटकाने का एक जरिया भी हो सकता है। क्योंकि इस इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट भी शुरू हो जाएगी।
लोग यह सोचने लगेंगे कि बाद में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी हो सकता है। इस बीच सरकार के पास आंदोलन को कमजोर करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
पार्टी का फोन आएगा तो जरूर उठाऊंगा
इस्तीफे के बाद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बिट्टू ने कहा कि वह पार्टी के फैसले का इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा, पार्टी का फोन आएगा तो मैं हमेशा की तरह उसे उठाऊंगा और जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे पूरी ईमानदारी, निष्ठा और ताकत के साथ निभाऊंगा।
भविष्य की भूमिका पर उन्होंने कोई सीधी टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन यह जरूर बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया है कि उन्हें लुधियाना से विधानसभा चुनाव का टिकट दिया जाए।
भाजपा ने राजस्थान से राज्यसभा के लिए भेजा था
रवनीत सिंह बिट्टू ने 2024 का लोकसभा चुनाव लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा और केंद्र में मंत्री बनाया। उनका यह राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया।
अब भाजपा ने बिट्टू की जगह तरुण चुग को राज्यसभा भेज दिया
हाल ही में भाजपा ने रवनीत सिंह बिट्टू की जगह अमृतसर से भाजपा नेता तरुण चुग को राज्यसभा भेज दिया। संवैधानिक प्रविधानों के अनुसार बिट्टू अभी छह महीने तक बिना सांसद बने मंत्री रह सकते थे, लेकिन उन्होंने निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।
आगे क्या? पंजाब विधानसभा चुनाव पर है नजर
अब भाजपा की नजर अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर है। राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि पार्टी पंजाब में बिट्टू के राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ का इस्तेमाल अपनी चुनावी रणनीति में कर सकती है।
हालांकि, फिलहाल बिट्टू का कहना है कि उनका पूरा ध्यान सिर्फ पार्टी के निर्देशों का पालन करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर रहेगा।