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क्या है भारत की बुलेट ट्रेन में इस्तेमाल हो रहा 'कैंटेड टर्नआउट्स', 320 km/h की रफ्तार पर भी यात्रियों को नहीं लगेगा झटका

मुंबई से अहमदाबाद के बीच बिछाए जा रहे इस 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले कॉरिडोर में ऐसी जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भारतीय रेल...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 01:42:13 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 01:42:13 PM (IST)
क्या है भारत की बुलेट ट्रेन में इस्तेमाल हो रहा 'कैंटेड टर्नआउट्स', 320 km/h की रफ्तार पर भी यात्रियों को नहीं लगेगा झटका
बिना झटके के बुलेट ट्रेन ऐसे बदलेगी ट्रैक। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में पहली बार इस्तेमाल हो रहा 'स्मार्ट टर्नआउट'
  2. कैंटेड टर्नआउट्स से रफ्तार में पटरी बदलने पर भी बेअसर रहेंगे झटके
  3. जापानी तकनीक से लैस बुलेट ट्रेन का सफर होगा बेहद सुरक्षित

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुंबई से अहमदाबाद के बीच बिछाए जा रहे इस 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले कॉरिडोर में ऐसी जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भारतीय रेल नेटवर्क में पहली बार देखी जा रही है।

अत्यधिक तेज गति पर ट्रेन का ट्रैक बदलना इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसे आसान और सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) 'कैंटेड टर्नआउट्स' तकनीक का उपयोग कर रहा है।

आम रेल ट्रैक से कैसे अलग है बुलेट ट्रेन का स्विचिंग सिस्टम?

सामान्य रेलवे नेटवर्क पर जब ट्रेन एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाती है, तो वहां मोड़ जैसी ढलान या झुकाव नहीं होता। जब गाड़ियां बिना ढलान वाले टर्नआउट से गुजरती हैं, तो पहियों पर अचानक विपरीत दबाव पड़ता है। इससे तेज कंपन, झटके और यात्रियों को असुविधा होती है।


यही वजह है कि आम ट्रेनों को पटरी बदलते समय अपनी स्पीड काफी धीमी करनी पड़ती है। हाई-स्पीड रेल में यात्रियों को झटकों से बचाने और बिना रफ्तार घटाए या न्यूनतम गति परिवर्तन के साथ पटरी बदलने के लिए कैंटेड टर्नआउट लगाया जाता है।

यह भी पढ़ें- भारत में बुलेट ट्रेन के कैसे बनेंगे ड्राइवर? कैसे होगा सेलेक्शन, जानिए नॉर्मल लोको पायलट से कितनी ज्यादा मिलेगी सैलरी

क्या होता है 'कैंटेड टर्नआउट'?

घुमावदार ट्रैक पर ट्रेन को बाहर की तरफ फेंकने वाले बल को बेअसर करने के लिए बाहरी रेल को अंदरूनी रेल से थोड़ा ऊंचा रखा जाता है। इस झुकाव को 'कैंट' (Cant) या 'बैंकिंग' कहते हैं। कैंटेड टर्नआउट की खासियत यह है कि यह पटरी बदलने वाले हिस्से में भी ट्रैक के इस झुकाव को टूटने नहीं देता।

इससे ट्रेन के पहियों पर लगने वाले बलों का संतुलन बना रहता है। इसकी मदद से 320 km/h की स्पीड में भी ट्रेन बिना किसी तेज झटके के आसानी से दूसरी पटरी पर शिफ्ट हो जाती है। इससे यात्रियों को बेहद आरामदायक और सुगम सफर का अहसास होता है।