लुधियाना की गगनप्रीत कौर (काल्पनिक नाम) की कहानी पंजाब के हजारों घरों की कहानी थी। पति की नशे की लत ने घर तोड़ दिया, बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला गया। लेकिन फरवरी 2025 में शुरू हुए “युद्ध नशियां विरुद्ध” अभियान ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज गगनप्रीत कहती हैं—“सरकार ने हमें सिर्फ इलाज नहीं दिया, जीने की वजह दी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में यह अभियान नशे को अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक बीमारी मानकर लड़ रहा है। तस्करों पर सख्ती के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास पर भी उतना ही जोर है। डी-एडिक्शन सेंटरों को मजबूत किया गया है और स्कूलों में बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि सरकार कितनी गंभीर है। अभियान के तहत अब तक 29,046 मामले दर्ज हो चुके हैं और 42,224 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। 1,845.840 किलो हेरोइन, 599.492 किलो अफीम, 27,230.559 किलो पोस्त, 49.764 किलो चरस, गांजा 623.077 किलो, कोकीन 4.364 किलो, नशीले इंजेक्शन 1,666 व नशीली गोलियां/ कैप्सूल 46,73,047 बरामद की गई। ड्रग मनी के रूप में 15,25,73,355 रुपये बरामद हुए, लेकिन असली सफलता उन परिवारों की मुस्कान है जो फिर से बस रहे हैं।
4,500 से अधिक गांवों का नशामुक्त घोषित होना बताता है कि बदलाव जमीन पर दिख रहा है। गांवों में बनी रक्षा समितियां अब खुद निगरानी कर रही हैं। सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर ने तस्करों का हौसला तोड़ा है।