Indo- Pak Border: भारत-पाक सीमा से सटे गांवों में बिना वर्दी के पहरेदार बने ग्रामीण
भारत-पाक सीमा से सटे गांवों में संदिग्ध व्यक्ति और वस्तु पर नजर रख रहे हैं ग्रामीण। ...और पढ़ें
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Publish Date: Wed, 13 Mar 2019 07:52:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 13 Mar 2019 08:39:09 PM (IST)

जयपुर। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के माहौल में सेना और बीएसएफ के जवानों की ही नहीं बल्कि ग्रामीण की आंखें भी निगहबान बनी हुई हैं। बिना वर्दी के ये पहरेदार सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर गढ़ाए हुए हैं। अफवाहों से दूर ग्रामीणों की नजरें सतर्क हैं। इनकी नजर संदिग्ध लोगों और वस्तुओं पर हमेशा बनी हुई है।
पाक सीमा से सटे गांवों में खेतों के मालिक और किसान अब खेती के साथ-साथ सीमा की सुरक्षा पर भी नजर रख रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पुलिस के साथ इनका पूरा तालमेल है । पाक सीमा से सटे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के चक-22, पीटीडी खाटां, पीएस-38 और 39, पीएस-44, काकू एवं सिहवाला जैसे कई सीमावर्ती गांवों से तारबंदी महज कुछ ही दूरी पर है।
चक-22 पीटीडी निवासी नंदलाल, चक-38 निवासी भजन सिह और चक-39 निवासी कुलविद्र सिह का कहना है कि हम सीमा के पास रह रहे हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारी सेना एवं बीएसएफ के जवानों की तरह ही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण संदिग्ध व्यक्ति अथवा वस्तु पर नजर रखते हैं। जैसे ही कोई संदिग्ध नजर आता है तुरंत पुलिस एवं बीएसएफ के अधिकारियों को सूचना देते हैं।
ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर ना तो इन दिनों पुलिस थानों में जा रहे हैं और ना ही रोजमर्रा के काम लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास। ग्रामीणों का मानना है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इन दिनों देश की सुरक्षा में व्यस्त हैं।
शाम होते ही घर में पहुंच जाते हैं ग्रामीण
सीमा से सटे गांवों के ग्रामीण अच्छी तरह जानते हैं कि शाम छह बजे से लेकर सुबह सात बजे तक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हुए हैं। इस समय के दौरान रोशनी जलाने पर भी रोक है। ऐसे में ग्रामीण शाम होते ही अपने-अपने घरों में पहुंच जाते हैं। दिन ढलते ही गांवों की गलियां सूनी हो जाती हैं। यही हालत कुछ दिन पहले तक दिनभर रौनक का केंद्र रहने वाली गांव की चौपालों की है। ग्रामीण पर चौपालों पर अब एक साथ एकत्रित नहीं होते । बीएसएफ और पुलिस की हिदायत के बाद ग्रामीण अधिक संख्या में एकत्रित नहीं होते। इसके विपरीत वह संदिग्धों पर नजर रखते हैं।
प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का सीमा से सटे गांव में रहने वाले लोग पूरा सहयोग कर रहे हैं। -संदीप कुमार, उपखंड अधिकारी, रायसिहनगर