Raja Man Singh: सात बार के निर्दलीय विधायक रहे राजा की पुलिस ने इसलिए कर दी थी हत्या
Raja Man Singh: राजा मानसिंह अपने झंडे के अपमान से काफी नाराज हो गए थे। ...और पढ़ें
By Yogendra SharmaEdited By: Yogendra Sharma
Publish Date: Wed, 22 Jul 2020 11:15:50 AM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2020 11:15:50 AM (IST)

Raja Man Singh: राजस्थान की सियासत में हमेशा राजसी आन, बान, शान का तड़का लगता रहा है। राजशाही के लोकशाही में बदलने के साथ रियाया पर राज करने वाले राजे-महाराजे अब जनसेवक बनकर उनके दिलों पर राज करने लगे। ऐसे ही महाराज से जनसेवक बने जननेता थे राजा मानसिंह। राजा मानसिंह भरतपुर राजघराने से संबंध रखते थे और राजनीति के साथ उस इलाके में भी उनका खासा दबदबा था।
राजा मान सिंह का जीवन परिचय
राजा मान सिंह का जन्म भरतपुर रियासत में 5 दिसम्बर 1921 को हुआ था। वह अपने पिता महाराजा किशनसिंह की तीसरी संतान थे। शिक्षा के लिए वह इंगलैंड गए और मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री लेकर वतन वापस लौटे। ब्रिटिश आर्मी में वह कैप्टन भी रहे। राजा साहब को राजा साहब सीनियर के नाम से भी जाना जाता था। मानसिंह का विवाह 1945 में कोल्हापुर राज्य के कांगल ठिकाने की राजकुमारी अजय कौर से हुआ और उनकी तीन बेटियां हैं।
1951 में सियासत में किया प्रवेश
राजा मान सिंह ने 1951 में सियासत की राह पकड़ी। 1952 में वो पहली बार विधानसभा के सदस्य बने और इसके बाद लगातार सात बार वह निर्दलीय रूप से जीतकर जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 1985 के विधानसभा चुनाव ने सब कुछ बदल कर रख दिया। राजा साहब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे और कांग्रेस ने उनके खिलाफ रिटायर्ड आईएएस बृजेंद्र सिंह को मैदान में उतारा था। उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर बृजेंद्र सिंह के पक्ष में डींग में एक रैली को संबोधित करने आए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके ध्वज का अपमान किया।
सीएम के मंच को किया क्षतिग्रस्त
राजा मानसिंह इस अपमान से काफी नाराज हुए और उन्होंने कांग्रेस को सबक सिखलाने का फैसला कर लिया। वह अपनी जोंगा जीप लेकर सीधे सभास्थल पहुंचे और उन्होंने रैली के मंच को काफी नुकसान पहुंचाने के साथ उनके हैलीकॉप्टर को भी टक्कर मारी। 21 फरवरी 1985 को वो अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में उनका सामना तत्कालीन डिप्टी एसपी कानसिंह भाटी से हो गया। डिप्टी एसपी कानसिंह ने उनके ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें राजा मानसिंह और उनके दो साथी सुमेर सिंह और हरी सिंह की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री ने दिया इस्तीफा
इस हत्याकांड को लेकर राजस्थान में इतना जनआक्रोश फैला की कांग्रेस आलाकमान को राज्य में मुख्यमंत्री बदलने के लिए विवश होना पड़ा। मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को मुख्यमंत्री पद से हटाकर सूबे की बागडोर हीरालाल देवपुरा को सौंप दी गई थी।