राजस्थान के अस्पताल ने रिसर्च के नाम पर पूछी लोगों से जात
यह कहा जा रहा है कि आंकड़े रिसर्च वर्क और मेडिकल स्टडीज में मदद करेंगे। ...और पढ़ें
By Sonal SharmaEdited By: Sonal Sharma
Publish Date: Fri, 26 Jul 2019 01:06:25 PM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jul 2019 01:12:53 PM (IST)

जयपुर। एसएमएस मेडिकल कॉलेज और इससे जुड़े सभी अस्पताओं में इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों को एक नई प्रणाली के तहत उनका धर्म बताने की जरूरत है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि यह जनसंख्या-विशिष्ट बीमारियों का डेटाबेस बनाने में मदद करेगा।
एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डी एस मीणा ने कहा, 'रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड्स से मिली जानकारी से हमें बीमारियों में रिसर्च में मदद मिलेगी, जो ज्यादातर बीफ खाने वाली आबादी के बीच प्रचलित हैं। इसके विपरीत, ऐसी बीमारियां भी है जो शाकाहारी लोगों में ज्यादा आम है।
उन्होंने कहा, 'इस तरह के आंकड़े रिसर्च वर्क और मेडिकल स्टडीज में मदद करेंगे। जैसे, हिंदुओं में, पुरुष जननांग संबंधी कैंसर अधिक आम है, जबकि मुसलमानों में, गठिया आम है। इसके अलावा, मुस्लिम महिलाओं में विटामिन डी की कमी आम है।'
वह यह बताने में असफल रहे कि ईटिंग हैबिट्स के इंडिकेटर के रूप में धर्म का उपयोग कैसे किया जा सकता है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल सुधीर भंडारी ने कहा कि रजिस्ट्रेशन के समय मरीजों को अपने धर्म का उल्लेख करने का फैसला केवल 'प्रोटोकॉल' था। यह रोगी के लिंग को पूछने जैसा है।'
जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह के नाम पर बना एसएमएस अस्पताल पहले ही 'धर्म' के साथ पर्सनल पर्टिक्यूलर्स सेक्शन में रजिस्ट्रेशन फॉर्म पेश कर चुका है।
अधिकारियों के मुताबिक जेके लोन हॉस्पिटल और इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज सहित अन्य सरकारी हेल्थकेयर संस्थान नए सिस्टम पर स्विच करने की प्रक्रिया में हैं।
अन्य डिटेल्स में पता, संपर्क नंबर, आधार और/या भामाशाह कार्ड नंबर शामिल हैं। भामाशाह योजना राजस्थान में सरकारी योजनाओं का वित्तीय लाभ महिलाओं को सीधे पहुंचाने की एक योजना है।
हेल्थकेयर एक्टिविस्ट ने मांग की है कि धर्म को रजिस्ट्रेशन फॉर्म्स से अलग करना चाहिए। हेल्थकेयर क्रुसेडर बृजमोहन शर्मा ने कहा कि ऐसी चीजें पहले कभी नहीं पूछी गईं। यह धर्म को स्वास्थ्य सेवा में खींचने का एक प्रयास है। सरकार को फॉर्म से धर्म का कॉलम को हटाना चाहिए।