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दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय अम्बे गौरी… शारदीय नवरात्रि पर यहां पढ़ें Durga Ji Ki Aarti…

Navratri Starts, Shardiya Navratri 2025 Durga Ji Ki Aarti: शारदीय नवरात्रि 2025 का पावन उत्सव आज 22 सितंबर से शुरू हो गया है और इसका समापन 2 अक्टूबर क...और पढ़ें

By ADITYA KUMAREdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 22 Sep 2025 04:03:28 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Sep 2025 05:35:26 AM (IST)
दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय अम्बे गौरी… शारदीय नवरात्रि पर यहां पढ़ें Durga Ji Ki Aarti…
शारदीय नवरात्रि यहां पढ़ें Durga Ji Ki Aarti…

HighLights

  1. मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है।
  2. आरती करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
  3. सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। प्रत्येक दिन पूजा के साथ आरती करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। यहां प्रस्तुत है मां दुर्गा की पारंपरिक आरती, जिसे भक्त नवरात्रि के दिनों में श्रद्धा भाव से गाते हैं। मां दुर्गा की आरती (Durga Ji Ki Aarti) पढ़ें...

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दुर्गा जी की आरती: ॐ जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

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