Doordarshan LIVE Aarti: दूरदर्शन पर राम लला की दैनिक श्रृंगार आरती का सीधा प्रसारण, तत्काल सेव करें डायरेक्ट लिंक
राम लला के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु रोज अयोध्या पहुंच रहे हैं। दूरदर्शन पर राम लला की आरती का सीधा प्रसारण होने से देश-दुनिया के करोड़ों राम भक्तो ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 25 Jul 2024 12:40:47 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jul 2024 12:48:48 PM (IST)

एजेंसी, अयोध्या (Ayodhya Ram Lalla daily Shringar Aarti)। 23 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम होने के बाद से आम भक्त राम लला के दर्शन कर रहे हैं। अब तक करोड़ों भक्त दर्शन लाभ ले चुके हैं। जो भक्त अयोध्या नहीं जा पा रहे हैं, उनके लिए दूरदर्शन (Doordarshan) पर राम लला की श्रृंगार आरती के सीधे प्रसारण की व्यवस्था की गई है।
दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर रोज सुबह 6.30 बजे राम लला की श्रृंगार आरती के दर्शन किए जा सकते हैं। टीवी चैनल के अलावा दूरदर्शन के यूट्यूब पर सीधा प्रसारण देखा सकता है।
Ayodhya Ram Lalla daily Shringar Aarti Live telecast Link
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से यह सुविधा दी गई है। ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य उन सभी राम भक्तों को राम लला के दिव्य दर्शन करवाना है, जो स्वयं श्रीराम मंदिर जाकर आरती में सम्मिलित नहीं हो सकते हैं।
राम लला की आरती का सीधा प्रसारण देखने के लिए यहां क्लिक करें
डीटीएच पर दूरदर्शन नेशनल के चैनल नंबर
सभी डीटीएच प्लेटफॉर्म पर दूरदर्शन नेशनल के चैनल उपलब्ध है। डिश टीवी पर इसका चैनल नंबर 115 है। वहीं, टाटा स्काई पर चैनल नंबर 114 और सन डायरेक्ट पर चैनल नंबर 310 पर यह चैनल उपलब्ध है।
सावन में हो रहा राम लला का विशेष श्रृंगार
- प्राण प्रतिष्ठा के बाद से पूरे विधि विधान से राम लला की पूजा-अर्चना की जा रही है।
- रामनवमी पर विशेष आयोजन हुए थे। राम लला को पकवान के भोग लगाए गए थे।
- अब 22 जुलाई से शुरू हुए सावन माह में भी प्रभू का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है।
- ट्रस्ट के अनुसार, पूरे सावन में राम लला को चांदी के झूले में झुलाया जा रहा है।
- प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह राम लला का पहला सावन है। झूलनोत्सव मनाया जा रहा है।
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राममंदिर में झूलनोत्सव की शुरुआत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से होती रही है। इसी दिन विशेष श्रृंगार के बाद ठाकुरजी झूले पर विराजते हैं। - आचार्य प्रेमचंद त्रिपाठी, गर्भगृह के पुजारी