यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Sheetkalin Char Dham Yatra: इतिहास में पहली बार शीतकालीन चारधाम यात्रा आज से, जानिए रूट और शेड्यूल
Winter Char Dham Yatra: आदि गुरु शंकराचार्य परंपरा के इतिहास में यह पहला अवसर है कि जब ज्योतिष्पीठ के आचार्य द्वारा उत्तराखंड स्थित चार धामों की यात्र...और पढ़ें
By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Wed, 27 Dec 2023 07:41:40 AM (IST)Updated Date: Wed, 27 Dec 2023 08:07:31 AM (IST)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शीतकालीन चारधाम यात्रा कर रहे हैं।HighLights
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कर रहे हैं शीतकालीन चारधाम यात्रा
- 7 दिवसीय यात्रा, हरिद्वार से शुरू होकर हरिद्वार में ही समाप्त होगी
- साल भर चार धाम यात्रा जारी रहने का संदेश दिया जाएगा।
एजेंसी, हरिद्वार। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 27 दिसंबर, बुधवार से वो करने जा रहे हैं, तो देश के इतिहास में आज तक नहीं हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह 8 बजे हरिद्वार से शीतकालीन चारधाम यात्रा पर रवाना हो गए। यात्रा 2 जनवरी तक चलेगी।
शीतकालीन चारधाम यात्रा क्यों
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि चार धाम यात्रा साल भर होना चाहिए। बर्फबारी और ठंड के कारण कुछ माह के लिए यात्रा बंद रहती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि वे खुद यात्रा पर जाएंगे और देखेंगे कि किस तरह की समस्याएं आती हैं।
इससे देशभर के लोगों में संदेश जाएगा और वे 12 माह चार धाम यात्रा पर जाने के लिए प्रेरित होंगे।
- शीतकालीन चार धाम यात्रा 27 दिसंबर से प्रारंभ होकर 2 जनवरी तक चलेगी। यात्रा का समापन हरिद्वार में होगा।
- 27 दिसंबर को सुबह 8 बजे हरिद्वार से यात्रा शुरू होने के बाद चारधाम यात्रा परंपरा के अनुसार सबसे पहले यमुना जी की शीतकालीन पूजा के लिए खरसाली गांव में यमुना मंदिर में पहला पड़ाव होगा।
- 28 दिसंबर को यात्रा आगे बढ़ेगी और उत्तरकाशी के रास्ते 29 दिसंबर को हर्षिल में गंगा जी की शीतकालीन पूजा स्थल मुखवा गांव पहुंचेगी।
- 30 दिसंबर को उत्तरकाशी विश्वनाथ के दर्शन होंगे। यहां से केदारनाथ के शीतकालीन पूजा स्थल ओंकारेश्वर का मार्ग तय किया जाएगा।
- अगले दिन यानी 31 जनवरी को यात्रा बद्रीनाथ के शीतकालीन पूजा स्थल जोशीमठ पहुंचेगी।
- इस तरह चारधाम यात्रा पूरी करने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायी 2 जनवरी को हरिद्वार पहुंच जाएंगे।