
धर्म डेस्क। गली-मोहल्लों में अक्सर यह नजारा देखने को मिलता है कि कुत्ते किसी इंसान को देखकर शांत रहते हैं, तो किसी दूसरे को देखते ही अचानक आक्रामक हो जाते हैं और जोर-जोर से भौंकने लगते हैं। विज्ञान इसके पीछे गंध और डर को कारण मानता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसके गहरे और रहस्यमयी संकेत बताए गए हैं। आइए इन्हें जानते हैं।
ज्योतिष में कुत्ते को 'केतु' का प्रतिनिधि माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु दोष है या केतु की स्थिति अशुभ है, तो कुत्ते उसे देखते ही अशांत हो जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि आपके जीवन में अचानक कोई मानसिक या शारीरिक परेशानी आ सकती है।
कुत्तों की छठी इंद्रिय (Sixth Sense) बहुत प्रबल होती है। शास्त्रों के अनुसार, वे उन नकारात्मक शक्तियों या बुरी ऊर्जाओं को महसूस कर सकते हैं जिन्हें इंसान नहीं देख पाता। यदि किसी व्यक्ति का 'ओरा' (आभा मंडल) दूषित है या उसके आसपास नेगेटिव एनर्जी है, तो कुत्ते भौंककर उसे चेतावनी देते हैं।
कुत्तों को शनि देव का दूत भी माना जाता है। यदि आप पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है और उसका प्रभाव अशुभ है, तो कुत्ते आपके प्रति आक्रामक व्यवहार कर सकते हैं। यह इशारा है कि आपको अपने कर्मों को सुधारने और शनि देव की शांति के उपाय करने की जरूरत है।
कुत्तों को यमराज का द्वारपाल माना जाता है। मान्यता है कि जिन परिवारों में पितृ दोष होता है या जिनके पूर्वज अतृप्त होते हैं, कुत्ते उन्हें देखकर विशेष प्रकार से प्रतिक्रिया करते हैं। यह एक अलार्म की तरह है कि आपको अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण या दान करना चाहिए।
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अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।