
धर्म डेस्क। मध्य प्रदेश के सिवनी के लखनादौन ब्लाक के धूमा में स्थित मां धूमावती मंदिर करीब 5 सदी पुराना है। यहां चार भुजाओं वाली माता काली की प्रचीन प्रतिमा स्थापित है। लोगों का मानना है कि माता की आराधना से धूमा क्षेत्र में दरिद्रता खत्म हो गई है।
वैसे तो इस मंदिर में साल भर भक्तों की कतार माता काली के दर्शन करने के लिएलगी रहती है, लेकिन नवरात्र के दौरान यहां दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
हर साल यहां श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने पर कलशों की संख्या बढ़ते जा रही है। धूमा के बुजुर्गों का कहना है कि धूमावती मां के पास जो भी पहुंचता है उसकी मनोकामना पूरी होती ही है।
यह मंदिर कितना प्राचीन है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंदिर का रिकार्ड किसी भी राजस्व दस्तावेजों में दर्ज नहीं है। कुछ साल पहले से सेवा सत्संग समिति में ग्वालियर की राजस्व शाखा में धूमावती देवी के इतिहास (रिकार्ड) के बारे में आवेदन लगाकर जानकारी मांगी थी।
ग्वालियर के राजस्व में भी इस मंदिर का रिकार्ड नहीं मिला। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक धूमा स्थित धूमावती मंदिर तकरीबन पांच सौ साल पुराना है। गांव के बुजुर्ग व्यक्तियों का मानना है कि 5 सदी पूर्व नागपुर के शासक रघुजी घोसले ने कई मंदिर बनवाए थे। जिस शैली में उन्होंने मंदिर बनवाए थे उसी शैली का यह धूमावती माता का मंदिर है।

जबलपुर का बूढ़ी खेरमाई मंदिर, यहां मां धूमावती स्वरूप में होती है उपासना
धूमावती देवी मंदिर में सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।मां के दर्शन करने से जीवन में आने वाली परेशानियां, रुकावटे और कष्ट दूर होते है। नवरात्र में यहां मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना की जाती है। मंदिर कितना पुराना है, इसकी वास्तविक जानकारी किसी को नहीं है।
मनोज पाठक, पुजारी धूमावती मंदिर
माता धूमावती का मंदिर स्थानीय लोगाें के साथ प्रदेश और देश भर में प्रसिद्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले अधिकांश यात्री मातारानी के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। शारदेय नवरात्र के दौरान यहां उत्सव का माहौल रहता है।
गोरेलाल साहू, समाजसेवी