
किशोर ग्वाला, नईदुनिया, मंदसौर। मंदसौर जिला मुख्यालय से लगभग 28 किमी दूर स्थित सीतामऊ कस्बे में गुप्तकालीन श्री महालक्ष्मीजी का मंदिर है। जहां दिवाली के दिन गौधूलि वेला में पोषाक पहनाने के इच्छुक भक्तों को 2065 की दीवाली तक का इंतजार करना पड़ेगा। यहां अगले 39 साल तक 2064 की दिवाली की बुकिंग हो चुकी है।
सबसे खास बात यह है कि पोषाक पहनाने के लिए यहां नाम भी केवल दीपावली के दिन गौधूलि वेला में ही लिखा सकते हैं। अतिप्राचीन मंदिर पर दर्शन करने दीपावली पर काफी दूर-दूर से भी भक्त आते हैं। धन तेरस पर भी कई भक्त मंदिर पहुंचे।
सीतामऊ में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर पर लक्ष्मी पूजन के दिन 8 नवंबर को सुबह 5:30 बजे से पट खुल जाएंगे। दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। यहां श्री महालक्ष्मी के पूजन-अर्चन व दर्शन करने नगर के साथ ही आस-पास से भी काफी लोग पहुंचेंगे।
इस मंदिर में दीपावली के दिन ही श्री महालक्ष्मी देवी को पोषाक चढ़ाने का विशेष महत्व होने के चलते भक्तों की लाइन लगी रहती है। पर नंबर के लिए वर्षों तक इंतजार बना रहता है। अभी भी यहां इस दिवाली पर कोई बुकिंग कराने पहुंचेगा तो 2065 की दीवाली पर नंबर आएगा। 2064 की दीवाली तक की पौषाख पहनाने की बुकिंग हो चुकी है।
सीतामऊ में व्यास घाटी स्थित श्री महालक्ष्मीजी की मंदिर में स्थित देवी महालक्ष्मी की मूर्ति को दिवाली पर गौधूलि वेला में पोषाक चढ़ाने का विशेष महत्व है। और बुकिंग भी इसी समय के लिए कराते हैं। इस बार 8 नवंबर को सीतामऊ निवासी विशाल चौरडि़या द्वारा कराई गई बुकिंग पर पोषाक पहनाई जाएगी। इन्होंंने 2015 में बुकिंग कराई थी। इसमें खास बात यह हैं गौधूलि वेला पर पोषाक चढ़ाने की बुकिंग भी 8 नवंबर को दीपावली पर गौधूलि वेला में ही की जाएगी है। धन तेरस पर भी मंदिर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महाआरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मंदिर के पुजारी की दसवी पीढ़ी में पूजा कर रहे प्रमोद मोड़ ने बताया कि मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। मान्यता है कि गुप्तकाल में किसी साधक द्वारा आकाश मार्ग से तीन मंदिर उड़ाकर ले जाए जा रहे थे तब सीतामऊ क्षेत्र में तपस्या कर रहे साधु ने अपनी शक्तियों का उपयोग कर इन्हें यही उतार लिया था।
यह भी पढ़ें- मंदसौर महालक्ष्मी मंदिर: पहली बार 4.5 करोड़ के नोटों और 100 किलो चांदी से हुआ महालक्ष्मी का भव्य श्रृंगार
इन मंदिरों में व्यास घाटी में स्थित श्री महालक्ष्मीजी मंदिर, राधा बावड़ी मंदिर व नांदिया की बावड़ी स्थित मंदिर शामिल है। तीनों मंदिरों की खासियत यह है कि इनकी साइज व बनावट एक जैसी है। जिले में श्री महालक्ष्मीजी का मंदिर मंदसौर जिला मुख्यालय के अलावा सीतामऊ में ही स्थित है।