धर्म डेस्क, नई दिल्ली। श्रीमद्भागवत और श्रीमद्भगवतगीता हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं। श्रीमद्भागवत में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। वहीं श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत का हिस्सा है जिसमें कृष्ण और अर्जुन के संवाद हैं। आसान शब्दों में कहा जाए तो श्रीमद्भागवत में श्री कृष्ण ने क्या किया है वह लिखा है, जबकि श्रीमद्भगवतगीता में श्री कृष्ण ने क्या कहा है वह लिखा है। श्रीमद्भागवत भक्ति का मार्ग दिखाती है, जबकि गीता जीवन की चुनौतियों का सामना करना सिखाती है।
श्रीमद्भागवत में 12 स्कंध और लगभग 18,000 श्लोक हैं। इसके अलावा इसमें 355 अध्याय भी हैं। यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की महिमा का वर्णन करता है, तथा भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन करता है। इसका उद्देश्य भगवान की लीलाओं के माध्यम से भक्ति के महत्व को समझाना है।
बात करें श्रीमद्भगवद्गीता की तो यह महाभारत के भीष्म पर्व का एक छोटा हिस्सा है, जिसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह ग्रंथ आत्मा, परमात्मा, कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग जैसे जीवन के रहस्यों को समझाता है। यह भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में हुए संवाद का संग्रह है। इसकी खासियत यह भी है कि यह जीवन से जुड़े प्रश्नों का समाधान देता है।
यह भी पढ़ें- एमपी के सभी University में अब श्रीमद्भागवत गीता की पढ़ाई, दिए जाएंगे तीन क्रेडिट अंक
अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।