_202616_135644.webp)
धर्म डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का विशेष महत्व बताया गया है। रत्नों में नीलम (Blue Sapphire) को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है, जिसका सीधा संबंध न्याय के देवता शनिदेव से है।
मान्यता है कि यदि नीलम किसी जातक को रास आ जाए, तो उसे रंक से राजा बनाने में देर नहीं लगती। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए नीलम पहनना सबसे शुभ होता है और इसे धारण करने की सही विधि क्या है।

शनिदेव को कर्मफल दाता कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, जब कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर होती है, तो व्यक्ति को करियर, कारोबार और स्वास्थ्य संबंधी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में शनि को मजबूत करने के लिए नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है। यह रत्न न केवल कंगाली दूर करता है, बल्कि जीवन में अनुशासन और सफलता भी लाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नीलम हर किसी के लिए शुभ नहीं होता, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह बेहद भाग्यशाली माना गया है-
मकर और कुंभ राशि - इन दोनों राशियों के स्वामी स्वयं शनिदेव हैं। इसलिए, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए नीलम धारण करना करियर और कारोबार में ऊंचाइयां प्रदान करता है।
तुला राशि - तुला राशि में शनि 'उच्च' के माने जाते हैं। इस राशि के जातकों के लिए नीलम सुख-समृद्धि और मानसिक शांति लाने वाला साबित होता है।
नीलम धारण करने से पहले कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं-
शुद्धिकरण - शनिवार को स्नान के बाद भगवान शिव और शनिदेव की पूजा करें। रत्न को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करके मध्यमा उंगली (Middle Finger) में धारण करें।
रत्ती का ध्यान - आमतौर पर इसे विषम संख्या (जैसे 5, 7, या 9 रत्ती) में पहनने की सलाह दी जाती है।
नीलम पहनने से पहले इसे 2-3 दिन तक अपने पास रखकर (तकिए के नीचे या हाथ पर बांधकर) परीक्षण जरूर करें। यदि इस दौरान बुरे सपने आएं या बेचैनी हो, तो इसे धारण न करें।