गुरुवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना चली जाएगी घर की सुख-समृद्धि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है, वहीं कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Jan 2026 10:02:03 AM (IST)Updated Date: Thu, 15 Jan 2026 10:02:03 AM (IST)
गुरुवार के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां।धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है, वहीं कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए।
मान्यता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से भाग्य रूठ सकता है। आइए जानते हैं गुरुवार के दिन क्या करें और किन कामों से दूरी बनाना बेहतर होता है।
गुरुवार के दिन भूलकर भी न करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार के दिन दाढ़ी बनाना, नाखून काटना या बाल कटवाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन और आयु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा महिलाओं को इस दिन बाल नहीं धोने चाहिए। कुछ मान्यताओं में गुरुवार को साबुन के इस्तेमाल से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। वहीं, इस दिन केले का सेवन करना भी शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि इससे घर की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है।
इन कार्यों से मिलती है सुख-समृद्धि
गुरुवार के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और बेसन के लड्डू जैसी पीली मिठाइयों का भोग लगाना शुभ फल देता है। ऐसा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गुरुवार को जरूर करें ये उपाय
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजा के समय केले के पेड़ के पास दीपक जलाने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा इस दिन चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र या केसर का दान करना शुभ माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि इससे कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
करें इन मंत्रों का जप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ बृं बृहस्पतये नमः
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥