एमपी के विदिशा में रावण बाबा और मेघनाद को माना जाता है पूर्वज, लेटी प्रतिमा और चबूतरा, स्तंभ की करते हैं पूजा
नटेरन तहसील के रावन गांव में रावण की नाभि पर घी का लेप लगाया जाता है, तो कुरवाई तहसील के पलीता गांव में मेघनाद के प्रतीक स्तंभ की पूजा होती है। दोनों ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 08:13:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 08:22:51 PM (IST)
विदिशा की नटेरन तहसील के ग्राम रावण में लेटी हुई रावण की मूर्ति। कुरवाई तहसील के गांव पलीता में मेघनाद का चबूतरा और स्तंभ।HighLights
- गांवों में दशहरे की अनूठी परंपरा।
- रावण को देवता मानकर पूजते हैं।
- मेघनाद को ग्राम देवता मानते हैं लोग।
अजय जैन, विदिशा। दशहरे पर जहां देशभर में रावण दहन होता है, वहीं विदिशा जिले के दो गांवों में रावण और उसके पुत्र मेघनाद की पूजा की जाती है। नटेरन तहसील के रावन गांव में रावण की नाभि पर घी का लेप लगाया जाता है, तो कुरवाई तहसील के पलीता गांव में मेघनाद के प्रतीक स्तंभ की पूजा होती है। दोनों गांवों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। ग्रामीण रावण और मेघनाद को अपना पूर्वज मानते हैं। खास बात यह है कि दोनों गांवों के बीच करीब 150 किलोमीटर की दूरी के बावजूद पारिवारिक रिश्ते भी जुड़े हुए हैं।
जिले की नटेरन तहसील में तो गांव का नाम ही रावण है। यहां गांव के एक छोर पर रावण की लेटी हुई प्रतिमा है। जिसे अब मंदिर का स्वरूप दे दिया है। यहां के पंडित नरेश तिवारी बताते है कि रावण ग्राम में दशहरे पर रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता, बल्कि रावण बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है।
यहां रावण को बुराई के प्रतीक के बजाय ग्राम देवता और इष्ट देव के रूप में पूजा जाता है। गांव में रावण बाबा का मंदिर है, जहां उनकी करीब 10 से 12 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा विराजमान है। ग्रामीणों की आस्था ऐसी है कि गांव में कोई भी शुभ कार्य हो या शादी-विवाह, सबसे पहले रावण बाबा को निमंत्रण दिया जाता है।
वे बताते हैं कि ग्रामीण उन्हें अपना आराध्य मानते हैं और हर मांगलिक कार्य में उनका आशीर्वाद लेना जरूरी समझते हैं। शादी-विवाह के निमंत्रण पत्र से लेकर अन्य शुभ अवसरों पर भी सबसे पहले रावण बाबा को आमंत्रित करने की परंपरा निभाई जाती है। तिवारी के अनुसार आज दशहरे पर दोपहर 12 से एक बजे तक रावण बाबा का विशेष पूजन और महा आरती होगी।
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यहां मेघनाद के बिना नहीं होता शुभ काम
- कुरवाई तहसील के पलीता गांव में मेघनाद को ग्राम देवता और प्रथम पूज्य माना जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में एक स्तंभ को मेघनाद का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। दशहरे पर यहां विशेष अनुष्ठान होता है।
- गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज खुद को रावण का वंशज मानते आए हैं। रावण के पुत्र मेघनाद को भी वे अपना पूर्वज मानते हैं। गांव में कोई भी शुभ काम मेघनाद की पूजा के बिना पूरा नहीं होता।
- नई बहू के आगमन और संतान के जन्म पर भी चबूतरे पर पूजा की जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, रावण और पलीता दोनों गांवों में कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवारों की बहुलता है।
- दोनों गांवों के बीच रिश्तेदारियां हैं और रोटी-बेटी के संबंध भी हैं। पलीता में पुरानी बावड़ी, प्राचीन भवनों और मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं।