मोर के बारे में जितना जानेंगे, उतना ही आपको यह रोचक लगता जाएगा। खासतौर पर इसका नृत्य और पंख। मोर पंख कालसर्प दोष को दूर करने का अचूक उपाय है। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने मुकुट पर मोर पंख लगाते थे।
भगवान शनि और कार्तिकेय का वाहन भी मोर है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि मोर के रोने से जो आंसू निकलते हैं उसे पीने से मोरनी गर्भवती हो जाती है? दरअसल, मोर अपने बदसूरत पैरों को देखकर रोता है।
एक वयस्क मोर की दिनचर्या
मोर एक पक्षी है। जो आम जीवों की तरह ही संतान उत्पन्न करता है। कुछ इस तरह...
- बारिश के समय नर, झील के किनारे आते हैं।
- झील पर नर अपना एक छोटा सा साम्राज्य बनाते हैं और मादाओं को वहां भ्रमण करने देते हैं।
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- जब मादा किसी विशिष्ट नर के साथ दिखाई देती हैं। और नर अपने पंखों को उठाकर प्रेमालाप के लिए आमंत्रित करते हैं।
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- पंख आधे खुले होते हैं और वह इन्हें जोर से हिलाकर समय समय पर मोर अजीब तरह की ध्वनि से चिल्लाते हैं।
- दक्षिण भारत में अप्रैल-मई में और उत्तर भारत में जुलाई से सितंबर तक मोर सक्रिय होते हैं।
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- मोर अपना घोंसला पत्तियां, डालियों और अन्य मलबे से बनाते हैं।
- घोंसलों में 4-8 हलके पीले रंग के अंडे होते हैं जिसकी देखभाल केवल मादा करती हैं।
- और इस तरह 28 दिनों के बाद अंडे से बच्चे बाहर आते हैं।