ज्येष्ठा नक्षत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक सुरक्षा विभाग से जुड़े काम, सरकारी कर्मचारी, संवाददाता, गुप्तचर, शल्य चिकित्सक आदि के रूप में सफल हो सकते हैं।
By Shailendra Kumar
Edited By: Shailendra Kumar
Publish Date: Wed, 03 May 2023 10:39:00 PM (IST)
Updated Date: Wed, 03 May 2023 10:39:00 PM (IST)
Jyeshtha Nakshatra: वैदिक ज्योतिष के अनुसार ज्येष्ठा, राशिचक्र का अठारहवां नक्षत्र है। इसका स्वामी बुध ग्रह है और देवता इंद्र हैं। यह लटकते कर्णफूल या छाते की तरह दिखायी देता है। यह मंगल द्वारा शासित वृश्चिक राशि में 226 डिग्री 40 मिनट से 240 डिग्री तक फैला हुआ है। ज्येष्ठा का अर्थ है वरिष्ठतम। लेकिन यहां यह बड़ी बहन या हाथ की मध्यमा उंगुली को दर्शाता है। ज्येष्ठा-बुध-मंगल का समन्वय जातकों को दिलेरी और स्वतंत्रता की अदम्य इच्छा देता है।
जातकों की विशेषता
इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत मित्रों वाले, नेता, प्रधान तथा कवि होते हैं। लेकिन ये दूसरों की तुलना में सीनियर बनने की कोशिश करते हैं, और वरिष्ठतम हो जाने पर निरंकुश सत्ता और सम्मान पाने की कोशिश करते हैं। ये सन्तान की ओर से भाग्यशाली, परन्तु गृहस्थ के सुख से वंचित रहते हैं। ये पत्नी-पक्ष से पीड़ित व व्यवसाय में अस्थिर रहते हैं। स्त्री जातक का गृहस्थ जीवन प्रायः अशान्त होता है, लेकिन ये सहायक, नर्सिंग आदि से धन अर्जित करती है।