• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विष पीने के बाद भगवान शिव को हो रही थी पीड़ा, राहत देने के लिए रावण ने वर्षों तक किया यह काम, आज भी जारी है परंपरा

सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। प्रत्येक वर्ष सावन माह में कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। शिवभक्त भोलेनाथ के जयकारों के साथ क...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Tue, 02 Jul 2024 11:47:24 AM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jul 2024 06:34:32 PM (IST)
विष पीने के बाद भगवान शिव को हो रही थी पीड़ा, राहत देने के लिए रावण ने वर्षों तक किया यह काम, आज भी जारी है परंपरा
समुद्र मंथन के बाद रावण ने किया था भगवान शिव का जलाभिषेक

HighLights

  1. समुद्र मंथन के दौरान निकला था विष
  2. भगवान शिव ने किया हलाहल का पान
  3. रावण ने किया था भोलेनाथ का जलाभिषेक

Kawar Yatra 2024 धर्म डेस्‍क, इंदौर। पवित्र सावन माह में भगवान शिव के पूजन का विधान है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं और भोलेनाथ का विशेष पूजन किया जाता है। इसके साथ श्रद्धालु पवित्र नदियों का जल कांवड़ में भरकर भोलेनाथ को चढ़ाने पहुंचते हैं। इस दौरान कांवड़ यात्रियों का जगह-जगह स्वागत किया जाता है। आपको यहां बताते हैं कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई थी और पहली कांवड़ ले जाना वाला शिवभक्त कौन था।

ऐसे हुई थी कावड़ यात्रा की शुरुआत

पौराणिक कथा के अनुसार कावड़ यात्रा का इतिहास समुद्र मंथन के समय से जुड़ा है। देवताओं और असुरों द्वारा मथे गए समुद्र से निकले विष को भगवान शिव ने पिया था। विष के प्रभाव से भगवान भोलेनाथ असहज अवस्था में पहुंच गए थे। विष के कारण भगवान शिव को हो रही पीड़ा को देखते हुए लंकापति रावण ने कांवड़ में गंगा जल भरकर कई वर्षों तक महादेव का जलाभिषेक किया था, जिसके बाद भगवान शिव विष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्त हुए थे।


पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस कथा के चलते संसार का पहला कांवड़ यात्री रावण को ही माना जाता है और रावण ने ही सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत की थी।

naidunia_image

22 जुलाई से शुरु हो रहा सावन

पंचांग के अनुसार 2 जुलाई से सावन माह की शुरुआत होगी। वहीं, 19 अगस्त सावन की पूर्णिमा के साथ यह माह समाप्त हो जाएगा। ऐसे में इस बार सावन 29 दिन का ही रहेगा।

सावन में इस बार पांच सावन सोमवार के व्रत रखे जाएंगे

पहला सावन सोमवार 22 जुलाई
दूसरा सावन सोमवार 29 जुलाई
तीसरा सावन सोमवार 5 अगस्त
चौथा सावन सोमवार 12 अगस्त
पांचवा सावन सोमवार 19 अगस्त

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'